श्रीरामचरितमानस की भाव सहित

8 नवम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित
नमो राघवाय 🙏

कोमलचित दीनन्ह पर दाया ।
मन बच क्रम मम भगति अमाया
सबहि मानप्रद आपु अमानी।
भरत प्रान सम मम ते प्रानी ।।
( उत्तरकांड 37/2)
जय सियाराम 🙏🙏
श्री राम राज्याभिषेक के बाद एक दिन भैया भरत ने श्री राम जी से संतों के लक्षण पूछे हैं, श्री राम जी कहते हैं कि उनका चित्त कोमल होता है , वे दीनों पर दया करने वाले होते हैं , मन , वचन व कर्म से मेरी विशुद्ध भक्ति करते हैं । वे सबको सम्मान देते हैं पर स्वयं मानरहित होते हैं । हे भरत ! ऐसे प्राणी मेरे प्राणों के समान ( प्रिय ) हैं ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी को संत प्रिय हैं, हम आप भी संतों के गुणों को अपनाकर श्री राम जी के प्रिय हो सकते हैं । अतः अपना चित्त कोमल और छल कपट रहित अथवा निर्मल करें, हृदय में दया करुणा का भाव रखें तथा मन, वचन और कर्म से श्री राम जी की विशुद्ध भक्ति करें। अथ…. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩

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