इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म में महिला अगर शामिल है तो उसे भी दोषी ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि वैसे तो कोई महिला दुष्कर्म का अपराध नहीं कर सकती है, लेकिन उसने लोगों के समूह के साथ मिलकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया तो संशोधित प्रावधानों के अनुसार उस पर गैंगरेप का मुकदमा चलाया जा सकता है।
यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के थाना बांसी में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर राहत देने से इन्कार कर दिया और कहा कि मामले में हस्तक्षेप की जरूरत नहींं है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने सुनीता पांडेय की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

