लखनऊ भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक एवं बैंक कर्मियों के भ्रष्ट आचरण से ग्राहक त्रस्त
अवैध है बैंक खातों को बेवजह फ्रीज करना
ब्यूरो चीफ आर एल पांडेय
लखनऊ। हरदोई में भारतीय स्टेट बैंक, शाहाबाद के शाखा प्रबंधक एवं बैंक कर्मियों के भ्रष्ट आचरण से ग्राहक बेहद परेशान हैं।
बुजुर्ग ग्राहक पेंशनर रुखसार बानो ने जब अपने एस बी आई खाते से नकद रकम निकालने गईं तो पता चला कि उनका बैंक खाता ‘ग्राहक को जानें (केवाईसी)’ मानक का ‘अनुपालन’ न होने के कारण फ्रीज कर दिया गया है। यानी वह अपने खाते से रुपये नहीं निकाल सकती थी। वह वर्षों से भारतीय स्टेट बैंक की ग्राहक थीं और पेंशन खाते के रूप में वह उसी खाते का इस्तेमाल कर रही थीं।
जब बैंक के पास उनका पेंशन पेमेंट ऑर्डर, आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि सब कुछ मौजूद था तो उनके धन को अवैध तरीके से रोककर उन्हें एक तरह से परेशान ही किया जा रहा था। उन्हें केवाईसी अद्यतन कराने के बारे में कोई पूर्व सूचना भी नहीं दी गई थी।
वीरेंद्र कुमार जब पैसे निकालने गए तो खाता होल्ड पर होने का पता चला। ऐसा ‘केवाईसी अनुपालन’ नहीं करने की वजह से किया गया है। उनका मानना है कि उन्होंने कुछ ही वर्ष पहले के वाई सी अद्यतन कराया था।जब वह शाखा प्रबंधक से मिले तो शाखा प्रबंधक सुशील कुमार वर्मा भड़क गए।
वीरेंद्र ने भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश पढ़े और पाया कि ऐसा कोई भी कदम उठाने के पहले बैंक को उन्हें लिखित सूचना देनी चाहिए।फिर भी जब वह अपने केवाईसी दस्तावेजों के साथ बैंक प्रबंधक से मिलने गए तो उसने उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि आखिर उनका खाता क्यों फ्रीज किया गया। इसी तरह अनीता जब अपने खाते से पैसे निकालने गईं तब उनको पता चला कि उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है। वह जोर देकर कहती हैं कि उन्होंने बैंक में केवाईसी दस्तावेज जमा किए थे लेकिन बैंक ने उसे कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर में अपडेट नहीं किया।
राजेश गुप्ता जब अपने बैंक खाते से रुपये आहरित करने में नाकाम रहे तब उन्हें पता चला कि पत्नी के साथ उनका संयुक्त खाता फ्रीज कर दिया गया क्योंकि उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी का केवाईसी अपडेट लंबित था।
ये मामले उन हजारों मामलों में से कुछ हैं जो हर रोज अपना ही धन इस्तेमाल नहीं कर पाते क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक ने उनके खाते फ्रीज कर दिए हैं।
अक्सर बैंक अधिकारी बिना नोटिस या अनुपालन के लिए पर्याप्त समय दिए केवाईसी को दोबारा जमा न करने के मामलों में लोगों पर इस तरह का दंड थोप देते हैं। ऐसे एकतरफा ढंग से खातों को फ्रीज करना स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन, ऋण अदायगी, क्रेडिट कार्ड के भुगतान या बिल भुगतान आदि को बुरी तरह प्रभावित करता है। पेंशन के सहारे जीवन यापन करने वाले वरिष्ठ नागरिक बिना किसी गलती के निरुपाय रह जाते हैं। एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि हम यह मानते हैं कि रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह अधिकार दिया है कि वे केवाईसी दस्तावेज अद्यतन न कराने वाले ग्राहकों के खाते फ्रीज कर सकते हैं।
परंतु अब जो जानकारी सामने आ रही है कि न तो बैंकों और न ही रिजर्व बैंक को ऐसा करने का अधिकार है। दरअसल रिजर्व बैंक ने बैंकों तथा रिजर्व बैंक द्वारा विनियमित अन्य संस्थानों के ग्राहक सेवा मानकों को लेकर केंद्रीय बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर बी पी कानूनगो की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जिसने बैंक ग्राहकों की समस्याएं दूर करने के बारे में बेहतरीन अनुशंसाएं कीं।
उसी रिपोर्ट में समिति कहती है, ‘समिति के सामने ऐसे मामले आए हैं जहां कुछ बैंकों ने खाताधारक द्वारा समय पर मांगे गए केवाईसी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर खाते का संचालन रोक दिया…, हालांकि नियम इसकी वकालत नहीं करते। कई मामलों में तो खाता धारकों द्वारा जारी किए गए चेक को भी नकार दिया गया।’
इस बात ने अवाक कर दिया। इस पूरी अवधि में बैंक यह दलील देकर लोगों के बैंक खाते फ्रीज करते रहे कि हमें अपनी पहचान के प्रमाण बैंक को बारंबार पेश करने होंगे ताकि बैंकों का दुरुपयोग धनशोधन या वित्तीय धोखाधड़ी के लिए न किया जाए। वहीं बैंक कहते हैं कि रिजर्व बैंक के निरीक्षक उन्हें परेशान करते हैं कि उन्होंने केवाईसी न होने की स्थिति में ग्राहकों के खाते फ्रीज क्यों नहीं किए? अब बताया जा रहा है कि ऐसा करना गैर कानूनी है।
रिजर्व बैंक ने कानूनगो समिति की रिपोर्ट पेश की है और 7 जुलाई तक जनता से इसकी अनुशंसाओं पर टिप्पणियां और प्रतिपुष्टि आमंत्रित की है। उसके बाद इसे अपनाने या न अपनाने का निर्णय लिया जाएगा। परंतु एक ऐसे मामले को लेकर 7 जुलाई तक प्रतीक्षा क्यों करना जिसके बारे में रिजर्व बैंक पहले ही जानता है कि बैंकों द्वारा खातों को फ्रीज करना अवैध है और यह ग्राहकों को बहुत प्रताड़ित करता है।
आज ही बैंकों को यह निर्देश क्यों नहीं दे दिया जाता कि वे केवाईसी अपडेट के नाम पर खाते फ्रीज करना बंद करें?
एक जानेमाने ग्राहक ने बताया कि खाते बंद करना इतना जटिल है कि वह थोड़ा सा धन खाते में रहने देते हैं और उसे भूल जाते हैं। आशा है समिति की रिपोर्ट का क्रियान्वयन इस तरह होगा कि बैंक ग्राहकों की ऐसी तमाम दिक्कतें दूर हों।भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक सुशील कुमार वर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर फोन किया, परंतु उन्होंने काल रिसीव नहीं की।

