श्रीरामचरितमानसकी भाव सहित चौपाई

9 अक्टूबर- श्रीरामचरितमानसकी भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

जनक सुकृत मूरति बैदेही।
दसरथ सुकृत रामु धरें देही ।।
इन्ह सम काहुँ न सिव अवराधे ।
काहुँ न इन्ह समान फल लाधे ।।
( बालकांड 309/1)
राम राम 🙏🙏
श्री दसरथ जी बारात लेकर जनकपुर पहुँच गये हैं । जनकपुर के लोग उन्हें देखकर कह रहे हैं कि जनक जी के पुण्य की मूर्ति श्री जानकी जी हैं तथा श्री दशरथ जी के पुण्य स्वरूप श्री राम जी हैं । इन दोनों राजाओं के समान किसी ने भगवान शिव जी की आराधना नहीं की है और न ही इन दोनों के समान किसी को फल मिला है ।
आत्मीय जन ! हमारे पुण्य व पाप क्रमशः पुण्य व पाप के रूप में ही हमारे जीवन में सामने आते हैं । श्री जनक जी व श्री दशरथ जी ने अपने को पुण्य में लगाया तो उन्हें श्री जानकी व श्री राम मिले । हम आप भी अपने पुण्य बढ़ाएँ, घर पर ही श्री सीताराम जी को पाएँ । अथ…. श्री राम जय राम जय जय राम,
सीताराम जय सीताराम , जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरुण जी लखनऊ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *