20 फ़रवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
नहिं सतसंग जोग जप जागा
नहिं दृढ चरन कमल अनुरागा ।।
एक बानि करूनानिधान की ।
सो प्रिय जाकें गति न आन की ।
( अरण्यकांड 9/4)
राम राम 🙏🙏
चित्रकूट में निवास करते हुए राम जी को बहुत दिन बीत जाते हैं , वे आगे चलते हैं। सुतीछन मुनि जो अगस्त्य ऋषि के शिष्य हैं उन्हें राम जी के आने की सूचना मिलती है । वे सोचते हैं कि क्या राम जी मुझसे अपने सेवक की तरह मिलेंगे । मैंने तो कभी सत्संग, योग जप , यज्ञ आदि नहीं किया है । दयालु राम जी का एक गुण जानता हूँ कि जिसे किसी दूसरे का सहारा नहीं होता है वह उन्हें प्रिय होता है ।
जिनकी सदा श्री राम जी में गति होती है , वे राम जी को भातें हैं । अतएव श्री राम जी में अपनी अनन्य गति रखें, राम प्रियता जरूर मिलेगी । अथ ! जय जय राम , जय जय राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

