23 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय !! 🙏
रागु रोषु इरिषा मदु मोहू ।
जनि सपनेहुँ इन्ह के बस होहू ।।
सकल प्रकार बिकार बिहाई ।
मन क्रम बचन करेहु सेवकाई ।।
( अयोध्याकाण्ड 74/3)
राम राम 🙏🙏
श्री लक्ष्मण जी को श्री राम जी अपने साथ वन चलने की अनुमति देते हैं और माँ से विदा लेकर जल्दी आने को कहते हैं । श्री लक्ष्मण सुमित्रा माँ के पास जाते हैं सब बताते हैं । धैर्य रखते हुए माता सुमित्रा जी कहती हैं कि यदि सीता-राम वन को जा रहे हैं तो अयोध्या में तुम्हारा कोई काम नहीं है । वे आगे कहती हैं कि राग , रोष , ईष्या , मद व मोह आदि के वश में स्वप्न में भी नहीं होना तथा सब प्रकार के विकारों को त्यागकर मन , वचन व कर्म से श्री सीताराम जी की सेवा करना ।
श्रीसीताराम जी की सेवा विकार युक्त जीव नहीं कर सकता है , विकार सेवा में बाधा उत्पन्न करते हैं, विकारी व्यक्ति सेवा करने की नहीं सेवा लेने की सोचता है । विकार तब दूर होते हैं जब सेव्य के प्रति आपका निष्काम प्रेम हो । श्री राम जी के प्रति अपना प्रेम बढ़ाकर ही आप उनकी सेवा कर सकते हैं । अतएव ! श्री राम प्रेम बढ़ाइए , श्री राम कृपा पाइए । अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

