7 अक्टूबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
जासु पतित पावन बड़ बाना।
गावहिं कबि श्रुति संत पुराना।।
ताहि भजहि मन तजि कुटिलाई।
राम भजें गति केहिं नहिं पाई ।।
( उत्तरकांड 129/4)
जय श्री सीताराम 🙏🙏
पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसी दास जी मानस जी को पूरा करते हुए कहते हैं कि पतितों को पवित्र करना जिसका सबसे बड़ा गुण है,वेद , पुराण , संत आदि ऐसा कहते हैं । अरे मन ! तू कुटिलता छोड़ श्री राम जी का भजन कर। श्री राम जी को भज कर भला किसे सद्गति नही मिली है ?
आत्मीय जनों! भगवान सबसे बड़े शुद्ध कारक हैं। शुद्ध होने के लिए जो जीव उनके पास जाता है उसकी वे क्वालिटी नही देखते हैं, बस भाव देखकर अपनी दया करुणा व स्नेह प्रदान करते हैं। कुटिलता त्याग भजेंगे तो जल्दी शुद्ध हो जाएँगे। अतः श्री सीताराम नाम भजें, कुटिलता त्यागे एवं सतत नाम भजन करते रहें, निश्चित ही सद्गति प्राप्त को प्राप्त करेंगे। अथ…. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

