24 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
बिनु घन निर्मल सोह अकासा ।
हरिजन इन परिहरि सब आसा ।
कहुँ कहुँ बृष्टि सारदी थोरी ।
कोउ एक पाव भगति जिमि मोरी
( किष्किंधाकांड 15/5)
राम राम 🙏🙏
राम जी वर्षा ऋतु में प्रवर्षण पर्वत पर निवास कर रहें हैं । वर्षा ऋतु का वर्णन करते हुए वे लक्ष्मण से कहते हैं कि बिना बादलों का निर्मल आकाश ऐसे शोभित हो रहा है जैसे भक्त सब आशाओं को छोड़कर शोभित होते हैं । कहीं कहीं शरद ऋतु की थोड़ी थोड़ी वर्षा हो रही है जैसे कोई विरले ही मेरी भक्ति पाते हैं ।
हम सब कामना युक्त हैं इसलिए मलिन है परंतु जब हम आप राम जी से युक्त हो जाएँगे तब हम निर्मल हो जाएँगे और निर्मल होने पर शोभित हो जाएँगे । अस्तु! शोभित होने हेतु , राम युक्त हो लें । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

