श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

28 सितम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

मंगलमूल राम सुत जासू ।
जो कछु कहिअ थोर सबु तासू ।
रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा ।
बदनु बिलोकि मुकुटु सम कीन्हा
( अयोध्याकाण्ड 1/3)
राम राम 🙏🙏
राम जी का विवाह हो गया है , सब लोग अयोध्या वापस आ गये हैं । अयोध्या में नित मंगल हो रहा है । सब चाहते हैं कि राजा जी राम को युवराज बना दें ।एक दिन राजा राजसभा में बैठे थे , राम जी का यश सुनकर वे आनंदित हैं ।मंगलों के मूल राम जी जिनके पुत्र हैं , उनके लिए जो कुछ कहा जायँ सब कम है । राजा ने दर्पण लेकर अपना मुख देखकर मुकुट ठीक किया है ।
राम जी मंगलों के मूल हैं , वे जिसके भी साथ हैं उसके ठाट बाट का क्या कहना ? राम जी हमारे आपके पुत्र तो नहीं हैं पर स्वामी तो हम उन्हें अपना बना सकते हैं , मान सकते हैं और इस तरह अपना सब कुछ ठीक कर सकते हैं । अस्तु! राम स्वामी , स्वामी राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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