श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

17 जनवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

हरि ब्यापक सर्बत्र समाना ।
प्रेम तें प्रकट होहिं मैं जाना ।।
देस काल दिसि बिदिसिहु माहीं
कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं ।
( बालकांड 184/3)
राम राम 🙏🙏
जब धरती पर रावण व उसके परिवार का दुराचार बढ़ जाता है तब धरती माँ ब्रह्मा जी के पास गौ रूप धारण कर मदद के लिए जाती हैं । ब्रह्मा जी कहते हैं भगवान का स्मरण करो , वे ही हम सबकी पीड़ा दूर करेंगे ।सब देवता भगवान के पास चलने के लिए कोई बैकुंठ तो कोई क्षीर सागर चलने को कहते हैं । शिव जी कहते हैं कि भगवान को खोजने की ज़रूरत नहीं वे तो सब जगह समान रूप से ब्याप्त हैं , मैं तो यह जानता हूँ कि वे प्रेम से प्रकट हो जाते हैं । देश , काल , दिशा ऐसी कौन सी जगह है जहाँ भगवान न हो ।
भगवान को खोजने के लिए इधर उधर भटके नहीं बस उनके प्रति अपना प्रेम बढ़ाएँ, वे आपके घर में , आपके हृदय में ही प्रकट हो जाएँगे । अथ ! प्रेम बढ़ाएँ , राम पाएँ, राम पाएँ 🚩🚩🚩

18 जनवरी श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

काम क्रोध मद मान न मोहा ।
लोभ न छोभ न राग न द्रोहा ।।
जिन्ह के कपट दंभ नहिं माया ।
तिन्हके हृदयँ बसहु रघुराया ।।
( अयोध्याकाण्ड 129/1)

राम राम 🙏🙏
बाल्मीकि जी ने राम जी को हृदय में धारण करने की हमें शर्तें बताई हैं , हमारे आपमें इनमें से कुछ भी नहीं हैं । इसीलिए राम जी का वास हमारे हृदय में नहीं है । अतः प्रयास रत रहें, राम जी में लगें रहें , लगे रहने पर वे ही हमारे यह सब दुर्गुण दूर कर सकते हैं ।अस्तु! लगें रहें, राम राम रटते रहें, राम काज करते रहें । अथ ! जय जय राम, जय श्री राम, जय जय राम, जय श्री राम, सीताराम जय सीताराम !!🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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