5 मई – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
पापवंत कर सहज सुभाऊ ।
भजनु मोर तेहि भाव न काऊ ।।
जौं पै दुष्ट ह्रदय सोइ होई ।
मोरे सनमुख आव कि सोई ।।
निर्मल मन जन सो मोहि पावा ।
मोहि कपट छल छिद्र न भावा ।।
( सुंदरकांड 43/2-3)
राम राम 🙏🙏
विभीषण श्री राम जी की शरण में आए हैं, सुग्रीव संदेह करते हैं । श्री राम जी उन्हें समझाते हुए कहते हैं कि पापी का स्वभाव होता है कि उसे मेरा भजन अच्छा नहीं लगता है । विभीषण दुष्ट ह्रदय का होता तो क्या मेरे पास आता ? । मुझे तो निर्मल मन के सेवक पाते हैं , मुझे छल कपट नहीं भाता है ।
भक्तों ! यदि आपका मन अन्य वस्तुओं को छोड़कर श्री राम जी में लग रहा है तो समझे कि श्री राम जी की प्रियता आपको आज नहीं तो कल अवश्य मिलेगी , कारण आप निर्मल हो रहे हैं , निर्मलता श्री राम समीपता की गारंटी है, बस निरन्तर श्री राम नाम का भजन करते रहें……. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम। सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम, 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

