पोलियो और जमुआ रोग भी निर्मूलीकरण की स्थिति में डीआईओ ने किया टीकाकरण कराने की अपील

विश्व स्वास्थ्य दिवस (सात अप्रैल) पर विशेष

जौनपुर,
काली खांसी, टिटनेस, नवजात टिटनेस (जमुआ रोग), हेपेटाइटिस-बी, बच्चों में होने वाला टीबी, पोलियो, वायरल निमोनिया, बैक्टीरियल निमोनिया, मेनेन्जाइटिस, मस्तिष्क ज्वर, मिजिल्स (दुलारो माता), रुबेला आदि बीमारियां टीकाकरण से रोकीं जा सकती हैं। इनसे बचाव के लिए जिले में हर बुधवार और शनिवार को गर्भवती माताओं और बच्चों का टीकाकरण किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और लोगों की जागरुकता की ही देन है कि जिले में टीकाकरण 90 प्रतिशत से ज्यादा पूर्ण हो चुका है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डीआईओ) डॉ.नरेन्द सिंह ने बताया कि पोलियो और नवजात शिशुओं में जमुआ रोग का लगभग निर्मूलीकरण हो चुका है। बाकी बीमारियों में टीकाकरण के साथ-साथ सर्विलांस (निगरानी) का कार्य लगातार चल रहा है जिसके कारण यह सभी जानलेवा बीमारियां निर्मूलीकरण के कगार पर पहुंच चुकी हैं। जिले में इनके एक-दो केस कभी कभार मिल जाते हैं।  डीआईओ का कहना है कि यदि पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत 95 के ऊपर होता रहेगा तो आने वाले दिनों में यह जानलेवा बीमारियां समाप्त हो जाएंगी। इसलिए जिले की माताओं और बच्चों को पूरे उत्साह के साथ टीका लगवाना जरूरी है। एक भी टीका छूटना नहीं चाहिए।
डीआईओ ने बताया कि चार से पांच वर्ष पहले तक इन बीमारियों के हजार से सैकड़ों की संख्या में मरीज आते थे, जबकि 2020-21 में डिप्थीरिया के 06, कालीखांसी के 21, मिजिल्स (दुलारो माता) के 71, मस्तिष्क ज्वर और नवजात टेटनस का कोई मरीज नहीं मिला है। 2021-22 में डिप्थीरिया, कालीखांसी और पोलियो का एक भी रोगी नहीं मिला। 2022 में अभी तक मात्र पांच मिजिल्स (दुलारो माता) के रोगी मिले। मस्तिष्क ज्वर का कोई मरीज नहीं आया और नवजात टेटनस का मात्र एक रोगी पाया गया। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य दिवस (सात अप्रैल) पर गर्भवती माताओं और बच्चों को इन 12 जानलेवा बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए प्रत्येक सप्ताह के बुधवार और शनिवार को अवश्य टीका लगवाने की अपील की है ताकि जिले को इन 12 जानलेवा बीमारियों से मुक्त किया जा सके।

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