प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मनाई गई स्वतंत्रता सेनानी जननायक कर्पुरी ठाकुर जी की जयंती

लखनऊ,  भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, जननायक कर्पुरी ठाकुर जी की जयंती आज यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष पूर्व सांसद श्री बृजलाल खाबरी जी की अध्यक्षता में मनाई गई। जिसमें उपस्थित कांग्रेसजनों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए नमन किया।

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पूर्व सांसद श्री बृजलाल खाबरी जी ने कहा कि 24 जनवरी 1924 को बिहार राज्य के समस्तीपुर में एक महान जन नायक का जन्म हुआ। लोकप्रियता के कारण उन्हें जन नायक कहा जाता है। वह भारत के स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ तथा बिहार राज्य के उपमुख्यमंत्री तथा दो बार मुख्यमंत्री रहे। वह बाबा साहब के अनुयायी थे। वह सरल और सरस हृदय के राजनेता माने जाते थे। उनकी सेवा भावना के कारण ही उन्हें जन नायक कहा जाता है, वह सदा गरीबों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पिछड़ों को आरक्षण दिया। उनका वक्तवय था कि ‘‘हक चाहिए तो लड़ना सीखो, कदम- कदम पर अड़ना सीखो, जीना है तो मरना सीखो’’

श्री खाबरी ने उनके जीवन से जुड़ी घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्व0 जन नायक कर्पूरी ठाकुर जब बिहार राज्य के मुख्यमंत्री थे तो उनके रिशते में बहनोई उनके पास नौकरी के लिए गए और कहीं सिफारिश से नौकरी लगवाने के लिए कहा। उनकी बात सुनकर कर्पूरी ठाकुर गंभीर हो गए। उसके बाद उन्होंने अपनी जेब से पचास रुपये निकालकर उन्हें दिए और कहा, “जाइए, अपना निजी व्यवसाय आरंभ कीजिए।” श्री खाबरी उनकी जीवन से जुड़ी एक घटाना पर बात करते हुए कहा कि जब वह राज्य के मुख्यमंत्री थे तो एक बार उनकी पत्नी अपने इलाज हेतु सरकारी गाड़ी से अस्पताल जा रही थीं जिसकी जानकारी उन्हें मिली तो उन्होंने उनको रोका और कहा कि आप सरकारी गाड़ी का उपयोग न करें और साधन लेकर अस्पताल जाए। श्री खाबरी ने कहा कि उनके जीवन से जुड़ी तमाम ऐसी घटनायें है जो उनको ईमानदार और जन नायक कहलाती हैं।

उन्होंने कहा कि श्री कर्पूरी ठाकुर जी ने बिहार में एक बार उपमुख्यमंत्री, दो बार मुख्यमंत्री तथा दशकों तक विधायक और विरोधी दल के नेता के रूप में कार्य करते रहे। 1952 की पहली विधानसभा में चुनाव जीतने के बाद वे बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे। राजनीति में इतना लंबा सफ़र बिताने के बाद जब उनका निधन हुआ तो अपने परिवार को विरासत में देने के लिए एक मकान तक उनके नाम नहीं था। ना तो पटना में, न ही अपने पैतृक घर में वो एक इंच जमीन जोड़ पाए और न ही उनके खाते में एक रूपये था। यह उनकी ईमानदारी की बेमिसाल पराकाष्ठा थी।

इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री श्री नकुल दुबे, पूर्व विधायक धीरेन्द्र सिंह धीरू, प्रभारी प्रशासन दिनेश सिंह, कोषाध्यक्ष श्री शिव पाण्डेय, प्रदेश सचिव चन्द्रशेखर मिश्रा, मीडिया संयोजक एवं प्रवक्ता अशोक सिंह, प्रदेश प्रवक्ता हम्माम वहीद, राजेश सिंह काली, गोविन्द सिंह, शिप्रा अवस्थी, मेहताब जायसी, केडी शुक्ला आदि कांग्रेस जन मौजूद रहे।

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