शासन द्वारा जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण हेतु जारी किए गए दिशा निर्देश को जिला प्रशासन द्वारा किया गया नजर अंदाज़

जौनपुर/लखनऊ – उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सभी मंडलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों को जनपदों में सरकारी भवनों विद्यालय अथवा अस्पताल के जर्जर भवन को देखते हुए उनका संचालन अन्यत्र जगह कराते हुए उक्त जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण की कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने का दिया गया निर्देश। वही शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों अनुसार ऐसे तमाम भवनों को भी चिन्हित करते हुए शासन के निर्देशानुसार ध्वस्तीकरण की कार्यवाही सुनिश्चित करने का दिया गया निर्देश। लोगों द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार नगर क्षेत्र स्थित भण्डारी स्टेशन से लेकर नगर के मुख्य मार्गो पर ऐसे तमाम भवन स्थित है जो बहुत पूराने व बेहद जर्जर अवस्था में है वही उनमें से कुछ जर्जर भवनों को चिन्हित करने के बावजूद नहीं कराया गया ध्वस्तीकरण, जो बड़ी अनहोनी को दे रहे हैं न्योता, बता दें कि जनपद के नगरपालिका अंतर्गत क्षेत्र रूहट्टा स्थित भैरव कुटी भवन जो सन् 1942 ई0 में निर्माण हुआ है देर रात झमाझम तेज बरसात के कारण जर्जर भवन का एक हिस्सा भरभराकर सड़क पर आ गिरा। कल भारी बरसात व बिजली चमकने से उक्त जर्जर भवन का एक हिस्सा भरभरा कर गिर पड़ा गिरा। गलीमत यह रहा कि जब जर्जर भवन का एक हिस्सा देर रात्रि उस वक्त गिरा जब झमाझम बरसात हो रही थी जिसके कारण उक्त भवन के आसपास कोई नहीं था नहीं तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। बताते चले की रुहट्टा स्थित नगरपालिका बालिका इन्टर कालेज निकट भैरव कुटी नामक 1942 ई0 का जर्जर भवन है जो कोरोना काल मे के दौरान उक्त जर्जर भवन का कुछ हिस्सा गिरा था जिसके बाद उक्त जगह बैरीकेडिंग कराई गयी थी। और बाद मे नगरपालिका द्वारा हटवायी गयी। जो एक बार पुनः देर रात्रि हुई झमाझम बरसात के साथ पुनः जर्जर भवन का एक हिस्सा गिर गया जिसके कारण ग्यारह हजार विद्युत तार को तोड़ते हुए विद्युत सप्लाई को बाधित किया। उक्त जर्जर भवन के गिरने से अच्छी बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नही हुई। उक्त जर्जर भवन के एक हिस्से के गिरने की जानकारी नगरपालिका अधिशासी अधिकारी संतोष मिश्रा को मिलते ही मौके पर पहुंचते ही मलबें को तत्काल हटवाने के लिए जेसीबी व नगरपालिका कर्मियों को लगाया गया। वही सवाल यह उठता है कि जहाँ एक तरफ जर्जर भवनों को चिन्हित करते हुए उसे गिराये जाने हेतु प्रदेश सरकार से लेकर जिला प्रशासन द्वारा निर्देशित किया गया था जिसके लिए नगरपालिका अधिकारियों द्वारा ऐसे जर्जर भवनों को चिन्हित भी किया गया था किन्तु आखिर आज तक क्यों नहीं ऐसे जर्जर भवनों को गिराया जा रहा हैं क्या जिला प्रशासन किसी अनहोनी होने के प्रतिक्षा में बैठा हैं कि जब कोई बड़ी घटना घटित हो जाएगी तब आनन फानन में ऐसे जर्जर भवनों को गिराया जाएगा। आखिर ऐसे जर्जर भवनों को गिराने की कब होगी कार्यवाही जो अपने में हैं बड़ा सवाल ?

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