27 जनवरी – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
निर्मल मन जन सो मोहि पावा ।
मोहि कपट छल छिद्र न भावा ।।
भेद लेन पठवा दससीसा ।
तबहुँ न कछु भय हानि कपीसा ।
( सुंदरकाड 43/3)
राम राम 🙏🙏
विभीषण राम जी की शरण में आए हैं , सुग्रीव कहते हैं कि भेद लेने आया है । राम जी कहते हैं कि मेरा प्रण तो शरण में आए को अभय करना है ।मुझे निर्मल मन वाले पाते हैं , छल कपट मुझे नहीं भाता है । यदि उसे रावण ने भेद लेने भेजा है तब भी कोई भय या हानि नहीं है ।
हमें आपको श्री राम जी का सानिध्य नहीं है इस कारण हम आप निर्मल नहीं हैं , हममें छल कपट भरा पड़ा है । जगत का सुमिरन मन को कलुषित करता है और जगदीश का सुमिरन मन को निर्मल बनाता है । अतः निर्मल होना चाहते हैं तो राम सुमिरन करें । अथ! श्रीराम जय राम , राम राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

