12 सितम्बर-श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
मोरें प्रौढ़ तनय सम ज्ञानी ।
बालक सुत सम दास अमानी ।।
जनहि मोर बल निज बल ताही ।
दुहु कहँ काम क्रोध रिपु आही।।
यह बिचारि पंडित मोहि भजहीं।
पाएहुँ ग्यान भगति नहिं तजहीं।।
( अरण्यकांड 42/4-5)
जय श्रीराम 🙏🙏
श्री राम जी को माता सीता जी के बिरह में देखकर नारद जी पंपा सरोवर के पास उनसे मिलने जाते हैं । श्री नारद मुनि जी कहते हैं कि आपने मुझे विवाह क्यू नहीं करने दिया। श्री राम जी कहते हैं कि मुझ पर जो आश्रित रहता है उसकी मैं हर तरह से देखभाल करता हूँ । ज्ञानी लोग मेरे प्रौढ़ पुत्र के समान हैं और दास जन मेरे बालक व पुत्र के समान हैं । दास को तो मेरा बल होता है जबकि ज्ञानी को खुद का बल होता है परंतु काम क्रोध आदि शत्रु दोनों के लिए होते हैं ।ऐसा विचार कर बुद्धिमान लोग मेरा भजन करते हैं तथा ज्ञान मिल जाने पर भी भक्ति नहीं छोड़ते हैं ।
आत्मीय जनों ! हमें चाहे कितना भी ज्ञान हो जाए , चाहे कितना भी हम बड़े व बलवान हो जायँ परंतु श्री राम जी के ही होके रहें जिससे श्री राम जी की दृष्टि हम पर पड़ती रहें, श्री राम कृपा हमें मिलती रहें और हम सीताराम नाम का भजन चिन्तन निरन्तर करते रहें। अस्तु…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

