आम के पेड़ो में फल झड़ना एक गंभीर समस्या : डा. विनोद सिंह
सुल्तानपुर
किसान भाइयों, आम के पेड़ों में फल झड़ना एक गंभीर समस्या है जो सीधे उत्पादन और आय को प्रभावित करती है। कई बार पेड़ पर अच्छी मात्रा में बौर और फल सेटिंग होने के बाद भी छोटे-छोटे फल गिरने लगते हैं, जिससे अंत में बहुत कम उत्पादन मिलता है। यह समस्या तब और बढ़ जाती है जब मौसम गर्म हो, पानी की कमी हो या पौधों को सही पोषण न मिल रहा हो। इसलिए समय रहते सही कारण पहचानकर उसका समाधान करना बहुत जरूरी है।
फल झड़ने का सबसे बड़ा कारण पोषक तत्वों की कमी होता है, खासकर बोरॉन और पोटाश की कमी। जब पौधे को ये तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते, तो फल कमजोर हो जाते हैं और पेड़ उन्हें गिरा देता है। इसलिए संतुलित पोषण देना जरूरी है। किसान भाइयों को फूल आने और फल सेटिंग के समय बोरॉन का छिड़काव करना चाहिए। 1 ग्राम बोरॉन प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करने से फल की पकड़ मजबूत होती है और झड़ना कम होता है। इसके साथ ही पोटाश का उपयोग भी बहुत जरूरी है। 13:0:45 या 0:0:50 को 5 से 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से फल मजबूत बनते हैं और उनका विकास अच्छा होता है।
सिंचाई प्रबंधन भी इस समस्या को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। कई बार किसान लंबे समय तक पानी नहीं देते या फिर एक साथ ज्यादा पानी दे देते हैं, जिससे पौधा तनाव में आ जाता है। फल बनने के समय हल्की और नियमित सिंचाई करना जरूरी है ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और पौधे को लगातार पोषण मिलता रहे। खासकर गर्मियों में पानी की कमी से फल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ती है।
हार्मोन असंतुलन भी एक बड़ा कारण है, जिसे सही तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए NAA (Planofix) का उपयोग बहुत प्रभावी रहता है। 10–20 ppm की मात्रा में, लगभग 1 मिली दवा को 4–5 लीटर पानी में मिलाकर मटर के दाने जितने फल होने पर छिड़काव करना चाहिए। इससे फल गिरने की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है और अधिक फल पेड़ पर टिके रहते हैं।
कम कीट और रोग भी फल झड़ने को बढ़ाते हैं। आम का हॉपर और अन्य कीट फूल और छोटे फलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे फल गिरने लगते हैं। इसके नियंत्रण के लिए सही समय पर दवा का उपयोग करना जरूरी है। साथ ही पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोग भी फल सेटिंग को प्रभावित करते हैं, इसलिए उनका नियंत्रण भी जरूरी है।
गर्मी और तेज हवा के कारण भी पौधों पर तनाव बढ़ जाता है, जिससे फल झड़ने लगते हैं। ऐसी स्थिति में मल्चिंग करना बहुत फायदेमंद रहता है। पेड़ के नीचे सूखी पत्तियां या जैविक अवशेष बिछाने से मिट्टी की नमी बनी रहती है और जड़ों को ठंडक मिलती है, जिससे फल गिरने की समस्या कम होती है।
यदि किसान भाई इन सभी उपायों को सही समय पर अपनाते हैं, तो वे फल झड़ने की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं और उत्पादन में अच्छा सुधार कर सकते हैं। सही पोषण, संतुलित सिंचाई और समय पर दवा का उपयोग ही सफलता की कुंजी है।
1. बोरॉन – 1 ग्राम प्रति लीटर पानी
2. पोटाश (13:0:45 या 0:0:50) – 5–10 ग्राम प्रति लीटर पानी
3. NAA (Planofix) – 1 मिली प्रति 4–5 लीटर पानी
4. इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL – 0.3 मिली प्रति लीटर पानी
5. थायोमेथोक्साम 25 WG – 0.25 ग्राम प्रति लीटर पानी
6. सल्फर 80 WP – 2 ग्राम प्रति लीटर पानी
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