ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
ग्रेटर नोएडा : ग्रेटर नोएडा कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर के आवंटन में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन के लिए आवेदन को अनिवार्य किए जाने से जिले के करीब 25,000 एमएसएमई उद्यमियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उद्योग जगत का कहना है कि इस फैसले का असर उनके रोजमर्रा के संचालन पर पड़ रहा है।
हाल ही में सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक कर दी है, जिससे उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, यह लाभ केवल उन्हीं इकाइयों को मिल रहा है जिन्होंने पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया है।
ग्रेटर नोएडा के कई औद्योगिक क्षेत्रों में अभी पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में उद्यमी चाहकर भी इस शर्त को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, स्टील और अन्य छोटे-बड़े उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
उद्योग संगठनों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि जिन क्षेत्रों में पीएनजी की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है, वहां के उद्योगों को अस्थायी रूप से राहत दी जाए और उन्हें पर्याप्त एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
गैस की सीमित उपलब्धता के कारण कुछ इकाइयों में उत्पादन की गति धीमी हुई है। हालांकि, उद्यमी उम्मीद जता रहे हैं कि जल्द ही इस स्थिति में सुधार होगा और उद्योग सामान्य रूप से चल पाएंगे।
प्रशासन का कहना है कि यह कदम पीएनजी नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। साथ ही, जिन क्षेत्रों में अभी सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह मुद्दा नीतिगत बदलाव और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन बनाने का है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन मिलकर ऐसा समाधान निकालेंगे, जिससे MSME सेक्टर को राहत मिल सके और विकास की रफ्तार बनी रहे।

