अयोध्या (संवाददाता) सुरेंद्र कुमार। जनपद अयोध्या में शिक्षक दिवस पर कई विद्यालयों में शिक्षक दिवस केक काटकर बड़े धूमधाम के साथ मनाया गया और इसके बारे में जगह जगह पर लोगों ने संदेश शिक्षकों के प्रति और छात्रों के प्रति क्या होना चाहिए इसका विश्लेषण किया गया।कोविड-19 महामारी का प्रकोप कम होने के साथ ही इस वर्ष पांच सितंबर को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस (teachers day) एक बार फिर धूमधाम से मनाया जाने वाला है। बीते तीन साल से कोरोना काल में स्कूली पढ़ाई के बदले परिवेश के साथ ही शिक्षक दिवस पर समारोह के आयोजन के तौर-तरीके भी बदल गए थे। लेकिन इस साल वापस से स्कूल-कॉलेज में रौनक लौटी है। बडे़ स्तर पर कार्यक्रमों को आयोजन भी होगा। ऐसे में छात्र अपने शिक्षकों के सम्मान में उनके लिए इस दिन को यादगार बना सकते हैं। भारत में शिक्षक को भगवान से पहले का दर्जा दिया जाता है।दरअसल जिंदगी में गुरु ही जो आपको सही गलत की पहचान कराकर सही रास्ते पर चलना सिखाता है। वास्तविक शिक्षक तो वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें, ऐसा कहना था देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का। वे देश के पहले उप-राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक मशहूर दार्शनिक और शिक्षाविद थे। 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के छोटे से गांव तिरुमनी में जन्मे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 27 बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। हर साल शिक्षकों को सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस 5 सितंबर को, उनकी जयंती के दिन मनाया जाता है। देश के भविष्य की वास्तविक पहचान उसके शिक्षक ही होते हैं, क्योंकि देश का भविष्य और विकास स्टूडेंट्स पर निर्भर करता है। शिक्षक ना सिर्फ हमें शिक्षा देते हैं बल्कि वह हमेशा हमें अच्छाई का रास्ता भी दिखाकर अच्छा इंसान बनाने की कोशिश भी करते रहते हैं।

