ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
नोएडा : नोएडा में लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान रोड-1 (MP-1) पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को एक बार फिर गति देने की तैयारी शुरू हो गई है। सेक्टर-3 स्थित रजनीगंधा अंडरपास से सेक्टर-57 तक बनने वाले इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के लिए आज से अलाइनमेंट सर्वे शुरू किया जा रहा है।
प्राधिकरण के अनुरोध पर आईआईटी की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर परियोजना के तकनीकी पहलुओं का आकलन करेगी। सर्वे के दौरान एलिवेटेड रोड के संभावित रूट, एंट्री-एग्जिट (लूप्स) और निर्माण में आने वाली बाधाओं की विस्तृत जांच की जाएगी। अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण में मौजूदा ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी परखी जाएगी।
यह परियोजना पहली बार वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav द्वारा शुरू की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह योजना लंबे समय तक ठप पड़ी रही। अब एक बार फिर इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम तेज किए गए हैं।
एलिवेटेड रोड के साथ-साथ, डीएनडी से यमुना पुस्ता होते हुए यमुना एक्सप्रेसवे तक सीधा संपर्क स्थापित करने की योजना पर भी काम चल रहा है। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को भविष्य में 10 लेन तक विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में शुरुआती चरण में 4 से 6 लेन के निर्माण पर ही विचार किया जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में कुछ संवेदनशील क्षेत्र बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिनमें Dalit Prerna Sthal और Okhla Bird Sanctuary प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण के लिए पर्यावरणीय और प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करना जटिल प्रक्रिया माना जा रहा है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना
अधिकारियों के अनुसार, Noida International Airport के संचालन के बाद नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस एलिवेटेड रोड और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
फिलहाल, पुस्ता मार्ग पर छह लेन का एक्सप्रेसवे विकसित करने और उसे चिल्ला एलिवेटेड रोड के माध्यम से महामाया फ्लाईओवर से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। भविष्य में इस नेटवर्क को और विस्तारित कर बेहतर शहरी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने का लक्ष्य है|
नोएडा का यह एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट न केवल ट्रैफिक जाम से राहत देगा, बल्कि शहर की कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा। सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में स्पष्ट प्रगति देखने को मिल सकती है।

