पास्को केस में बरी प्रो0 पर फिर कसा शिकंजा, अदालत ने जारी किया नोटिस,फर्जी साक्ष्य का आरोप

पास्को केस में बरी प्रो0 पर फिर कसा शिकंजा, अदालत ने जारी किया नोटिस,फर्जी साक्ष्य का आरोप

जौनपुर,09 अप्रैल । यूपी के जौनपुर स्थित तिलकधारी विधि महाविद्यालय, पीलीकोठी में तैनात प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार सिंह एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। 10 वर्षीय बालक से कुकर्म के गंभीर आरोपों वाले पास्को मामले में दोषमुक्त होने के बाद अब उनके खिलाफ अदालत में फर्जी साक्ष्य पेश करने का नया मामला दर्ज हुआ है। विशेष पास्को न्यायालय ने इस प्रकरण में प्रोफेसर सहित अन्य संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि 31 मई 2023 को दर्ज मामले में डॉ. संतोष कुमार सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 377, 342, 506 तथा पास्को एक्ट की धारा 5(डी)/6 के तहत आरोप लगे थे। हालांकि, अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश उमेश कुमार द्वितीय (पास्को) ने 24 फरवरी 2026 को दिए अपने फैसले में उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया था।
अदालत में अपने बचाव के दौरान प्रोफेसर ने दावा किया था कि घटना के समय वे कॉलेज परिसर में मौजूद थे और सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक पीएचडी शोधार्थियों को पढ़ा रहे थे। इस दावे के समर्थन में उन्होंने शोधार्थियों की उपस्थिति पंजिका (रजिस्टर) को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया था। शोधार्थी मनोज कुमार गुप्ता और अजय कुमार सिंह ने भी अदालत में गवाही देकर इस रजिस्टर को सही बताया था, जिसके आधार पर उन्हें राहत मिली।
हालांकि, पीड़ित बालक की मां श्रीमती सुषमा सिंह को इस साक्ष्य पर संदेह हुआ। उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी, जिसमें खुलासा हुआ कि तिलकधारी विधि महाविद्यालय परिसर में पीएचडी कोर्स वर्क संचालित ही नहीं हुआ था, बल्कि यह कोर्स वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में आयोजित हुआ था।
इस तथ्य के सामने आने के बाद श्रीमती सुषमा सिंह ने अपने अधिवक्ता विकास तिवारी के माध्यम से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 340 के तहत विशेष पास्को न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए डॉ. संतोष कुमार सिंह, मनोज कुमार गुप्ता और अजय कुमार सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।इस मामले में गुरुवार को जानकारी देते हुए
परिवादिनी पक्ष के अधिवक्ता विकास तिवारी ने बताया कि अभियुक्तों ने अदालत को गुमराह करने के लिए झूठी गवाही दी और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिससे न्याय प्रक्रिया और अदालत की गरिमा को ठेस पहुंची है। इसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालयल ने संतोष कुमार सिंह और अन्य दो लोगों को नोटिस दिया है।
वहीं, पीड़ित की मां सुषमा सिंह ने कहा कि उनके नाबालिग बच्चे के साथ हुए अपराध के बाद अब न्यायालय को भी धोखा देने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि वे सच्चाई सामने लाने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।
फिलहाल यह मामला प्रकीर्ण वाद के रूप में न्यायालय में विचाराधीन है। अगली सुनवाई के लिय 12 मई तिथि निर्धारित किया गया है।इसमें आरोपितों को अपना पक्ष रखना होगा।

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