बरेली शहर की सुप्रसिद्ध साहित्यिक संस्था लेखिका संघ के तत्वावधान में कवियित्री अंशु गुप्ता के स्टेट बैंक कॉलोनी स्थित आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन सम्पन्न

बरेली, 23 जुलाई। शहर की सुप्रसिद्ध साहित्यिक संस्था लेखिका संघ के तत्वावधान में कवियित्री अंशु गुप्ता के स्टेट बैंक कॉलोनी स्थित आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता लेखिका व कवियित्री मोना प्रधान ने की।
काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ डॉ किरण कैथवाल की वाणी वंदना से हुआ।
मोना प्रधान ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,,, जलधारा सी कल कल बहती जाऊँ मैं, बस्ती बस्ती पर्वत मैदाँ सबकी प्यास बुझाने मैं।
वरिष्ठ गीतकार कवि कमल सक्सेना ने अपना गीत पढ़ते हुए कहा कि,,,
आधा जीवन बीत गया है दिल का दर्द सुनाने में कौन सुनेगा दर्द हमारा इस बेदर्द ज़माने में। जिसपर सभी ने तालियां बजायीं।
वरिष्ठ कवि शायर हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष ने कुछ ऐसे पढ़ा,,,
रखकर उसूल ताख पर तहज़ीब ज़ेब में। उलझा हुआ है आदमी मक्रो फरेब में।
संस्था की अध्यक्ष दीप्ती पांडे नूतन ने अपनी ग़ज़ल इस तरह से पढ़ी।,,,,
,पहले दिल से जरा मशवरा कीजिए फिर मोहब्बत का शिकवा गिला कीजिए। मुझको बेवफा कहने से पहले जरा रूबरू अपना भी आईना कीजिए। जिसे सभी ने पसंद किया.
संस्था की महासचिव डॉ किरण कैंथवाल ने अपनी प्यार भरी रचना पढ़कर सबका मन मोह लिया,,, तू जो कहदे आसमां से चाँद लाऊं मैं। तू जो कहदे और थोड़ी देर ठहर जाऊं मैं।
अंशु गुप्ता ने माँ पर कविता पढ़ते हुए कहा कि,,,, अपने घर की छत बन रही हूँ. कभी थी घर के कँगूरों जैसी अब नींव में ढल रही हूँ, कुछ माँ जैसी बन रही हूँ।,,जिसे सभी ने पसंद किया।
उमा शर्मा ने कहा कि,,,,त्रिशूल धारी जटा धारी कैलास के वासी, जिनकी महिमा गाये सृष्टि शिव हैँ सबके अंतरवासी।
मीरा मोहन ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा कि,,,, बरसात की पहली बूंद गिरी मन फिर जैसे भीग गया। कागज़ की नावें याद आयीं बचपन कहीं से झाँक गया।
अनुराग त्यागी ने पिता पर अपनी रचना कुछ ऐसे पढ़ी,,,, पिता का प्यार पिता का दुलार दिखता नहीं पर होता है। क्या दे दोगे तुम पिता को पिता ही है तुम्हारा आधार।
इसके बाद मीना अग्रवाल ने अपनी प्यार से ओत प्रोत ग़ज़ल पढ़ी। अविनाश अग्रवाल ने कहा कि,,,,
बेशक़ हमारी आह का उन. पर असर न हो। दिल का है हुकुम प्यार में फिर भी कसर न हो।काव्य गोष्ठी का सफल व सरस् संचालन गीतकार कमल सक्सेना ने किया। अंत में अंशु गुप्ता ने अभी कवियों का आभार व्यक्त किया और सभी को स्वदिष्ट जलपान के लिए आमंत्रित किया। सभी कवियों व कवयित्रीयों ने अंशु गुप्ता के आतिथ्य के लिए मन से प्रसंशा किया गया।

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