रिपोर्ट-जनार्दन श्रीवास्तव
पाली-हरदोई क्षेत्र के ग्राम मलिकापुर में चल रही मद्भागवत कथा के समापन दिवस में आचार्य श्री सत्यदेव जी महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसास्वादन कराते हुए भारी संख्या में उपस्थित सभी स्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोगों ने जयकारे लगाते हुए कथा का रसास्वादन किया। आचार्य जी ने पूतना राक्षसी को अविद्या का स्वरूप बताया और कहा कि जीव जब भगवत विमुख होता है तभी जीवन में अविद्या आती है।पूर्णावतार श्रीकृष्ण तथा पूर्णावतार भगवान श्रीराम ने प्रथम स्त्री पर हाँथ डाला। श्रीराम ताड़का तथा श्रीकृष्ण पूतना का प्रथम उद्धार करते हैं। ताड़का वासना की मूर्ति है,इस जीव के भगवत शरणागति होने पर अविद्या एवं वासना से मुक्ति मिलती है।श्रीकृष्ण ने पूतना का स्तनपान कर उसे सदगति प्रदान की है। उन्होंने कालिया नाग को काम का स्वरूप दर्शाते हुए यह सिद्ध किया कि यमुना जल इस सर्व की विषागनि से दूषित हो गया था। अर्थात कामवासना मानव के जीवन में मन, अन्तःकरण, चित्त, को दूषित कर देती है।अतः कामवासनाओं से हम सभी को दूर रहना चाहिए। हम सभी भक्त सनातन धर्म के पक्षधर हैं। नागपंचमी को नागों की पूजा करते हैं,हम शांति के पूर्ण पक्षधर हैं,परन्तु यदि कोई हमारी अखंडता,एकता,समरसता में कालिया नाग की तरह प्रदूषण उत्पन्न करेगा तो हम कालिया नाग के फनों पर तांडव भी करना जानते हैं। इसलिये श्रीकृष्ण ने इसके फनों पर तांडव करके यही भाव स्पष्ट किया है।गोवर्धन पूजा के माध्यम से इन्द्र का अभिमान मर्दन करते हैं। और कंस रूपी मोह का संधार करते हैं।भगवान श्रीकृष्ण समग्र समाज की इन बुराइयों को दूर करके स्वच्छ वातावरण का सृजन करते हैं। इसलिए इस समय भी समाज को श्रीकृष्ण की आवश्यकता बताया है।इस मौके पर सभी श्रोता श्रद्धालुओं ने आरती कर परसाद ग्रहण किया।

