30 जून – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो रागवाय 🙏
जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा ।
तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा ।।
सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती ।
करहिं सदा सेवक पर प्रीती ।।
( सुंदरकांड 6/3)
राम राम 🙏🙏हनुमान जी माँ को खोजते हुए लंका में विभीषण जी के महल पहुँचते हैं । विभीषण जी हनुमान जी से कहते हैं कि राम जी ने मुझ पर कृपा की है तभी आपने मुझे स्वयं दर्शन दिया है ।हनुमान जी कहते हैं कि विभीषण जी सुनिए! राम जी की यह रीति है कि वे अपने सेवक से सदा प्रेम करते हैं ।
राम जी की रीति हनुमान जी ने बता दी है , इसे हम सब भी जान गये हैं फिर भी हम आप राम कृपा न मिलने का उलाहना राम जी से व अन्य लोगों से देते रहते हैं ।अत: राम कृपा चाहिए तो हनुमान जी ने जो कहा उस पर ध्यान देते हुए अपनी सेवा बढ़ाएँ, राम सेवा में मन लगाएँ । अथ ! राम राम , जय राम राम 🚩🚩🚩
तरूण जी लखनऊ

