22 दिसम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई,
नमो राघवाय 🙏
पुरुष नपुंसक नारि वा,
जीव चराचर कोइ ।
सर्ब भाव भज कपट तजि,
मोहि परम प्रिय सोइ ।।
( उत्तरकांड, दो. 87)
राम राम 🙏🙏
काकभुसुंडि जी को भक्ति का वर देने के बाद राम जी काकभुसुंडि से कहते हैं कि पुरुष हो , नपुंसक हो, स्त्री हो या चर अचर कोई भी जीव हो , कपट छोड़कर जो मुझे भजता है वह मुझे परम प्रिय हो जाता है ।
हम सब राम प्रियता चाहते हैं । राम जी ने अपनी प्रियता पाने का उपाय बताया है, वह है कपट रहित भजन , जो ऐसा करता है , वह राम जी का परम प्रिय हो जाता है । अस्तु कपट तज , राम भज , प्रिय बन 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

