24 अप्रैल- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
स्वामि सखा पितु मातु गुर,
जिन्ह के सब तुम्ह तात ।
मन मंदिर तिन्ह कें बसहु,
सीय सहित दोउ भ्रात।।
( अयोध्याकाण्ड, दो . 130)
राम राम🙏🙏
श्री राम जी वन जाते हुए श्री बाल्मीकि जी के आश्रम आए हैं तथा मुनि जी से अपने रहने का स्थान पूछते हैं । श्री बाल्मीकि जी कहते हैं कि हे वत्स ! जिनके स्वामी, मित्र, पिता, माता और गुरु सब कुछ आप ही हैं ,उनके मन रूपी मंदिर में श्री सीता जी सहित आप दोनों भाई वास करें ।
भक्तों ! श्री बाल्मीकि जी ने कहा कि जिनके सब कुछ आप हो उसके मन मंदिर में वास करें । हमारे मन मंदिर में श्री राम वास नहीं है कारण हम केवल वह संबंध रखना पसंद करते हैं जिसमें केवल सांसारिक सुख मिलता रहें, और निस्वार्थ प्रभू सेवा, समाज सेवा, मानव सेवा में कुछ देना न पड़े । अतः श्री राम जी से सभी प्रकार के संबंध निष्काम भाव से निभाएँ तथा श्री लक्ष्मण जी सहित श्री सीताराम जी का साथ पाएँ । अतः श्री सीताराम जी को अपने हृदय पटल पर बैठाएं और निरन्तर श्री सीताराम जी का नाम भजन करते रहें,……. सीताराम सीताराम सीताराम, सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम। श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।।
🚩🚩🚩 संकलन तरूण जी लखनऊ

