26 मई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
भव बंधन ते छूटहिं
नर जपि जा कर नाम ।
खर्ब निसाचर बाँधेउ
नागपास सोइ राम ।।
( उत्तरकांड, दो. 58)
राम राम 🙏🙏
लंका युद्ध के दौरान लीला करते हुए राम जी ने अपने आप को मेघनाद के हाथों बँधा लिया । नारद जी ने गरुड़ को भेजा है । गरुड़ जी आते हैं और राम जी को बंधन में देख सोचते हैं कि जिनका नाम जपकर मनुष्य संसार के बंधन से छूट जाते हैं उन्हीं राम जी को एक छोटे से राक्षस ने नागपाश से बाँध दिया है ।
श्री सीताराम चरण प्रेमियों, श्री राम जी बंधन हीन हैं , वे बंधन छुड़ाने वाले हैं और सब उनकी लीला है। इससे अधिक सोचना अपने को बंधन में डालना है । ऐसा वही करते हैं जो श्री राम नाम नहीं जपते हैं । अतः विकार रहित भाव के लिए श्री राम नाम जपें । अतएव सतत नाम भजन करते रहें…… श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । जय सियाराम जय जय सियाराम सीताराम जय सीताराम जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

