13 सितंबर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
स्वारथ साँच जीव कहुँ एहा ।
मन क्रम बचन राम पद नेहा ।।
सोइ पावन सोइ सुभग सरीरा ।
जो तनु पाइ भजिअ रघुबीरा ।।
( उत्तरकांड 95/1)
जय श्री सीताराम🙏🙏
काकभुसुंडि जी ने गरुड़ जी को अपने मोह की कथा सुनाई है । गरुड़ जी फिर पूछते हैं कि किस कारण से आपने यह काक शरीर पाया। काकभुसुंडि जी कहते हैं कि इस शरीर से मैंने श्री राम जी की भक्ति पाई इसीलिए यह मुझे प्रिय है। जीव का सच्चा स्वार्थ यही है कि वह मन वचन व कर्म से श्री राम चरणों में प्रेम करे। मानव शरीर तभी पावन व सुंदर है जब इस शरीर को पाकर श्री राम भजन किया जाए,अन्यथा मानव जन्म ही बेकार हो जायेगा
मानव शरीर हमको आपको मिला है, इसे श्री राम चरणों में समर्पित कर सच्चे स्वार्थी बने और अपना सब कुछ पावन व सुंदर बना लें, अन्य किसी भी सांसारिक जीवों या वस्तुओं से प्रेम करके हम आप कहीं के भी नहीं रहेंगे, साथ ही अपना अमूल्य मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता खो देंगे, अतः श्री सीताराम नाम जप से श्री सीताराम जी के भक्ति में लग जाएं। अस्तु.…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

