श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

11 नवम्बर- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

जेहिं सायक मारा मैं बाली ।
तोहिं सर हतौं मूढ कहँ काली
जासु कृपाँ छूटहिं मद मोहा ।
ता कहुँ उमा कि सपनेहुँ कोहा।
जानहिं यह चरित्र मुनि ग्यानी ।
जिन्ह रघुबीर चरन रति मानी ।।
( किष्किंधाकांड 17/3-4)
जय सियाराम 🙏🙏 श्री राम जी ने बालि को मारकर सुग्रीव को राजा बना दिया है । वर्षा ऋतु बीतने पर वे भैया लक्ष्मण जी से कहते हैं कि राज्य पाकर सुग्रीव भी मुझे भूल गया है । जिस बाण से मैंने बालि को मारा था उसी बाण से कल सुग्रीव को मारूँगा । भगवान शिव जी कहते हैं कि उमा ! जिसकी कृपा से मद व मोह छूट जाते हैं वह स्वप्न में भी क्या क्रोध कर सकता है । ज्ञानी मुनि जिन्होंने श्री राम चरणों में प्रीति जोड़ ली है , वे ही श्री राम जी की इस लीला रहस्य को जानते हैं ।
आत्मीय जन ! श्री राम जी करुणा निधान हैं , उनका क्रोध हमें बोध कराने के लिए होता है परंतु यह वही समझ सकता है जिसने श्री राम चरणों में प्रीति कर ली है । अतः श्री राम चरणों की भक्ति पाने के लिये श्री सीताराम नाम का निरन्तर भजन करते रहिए। अथ…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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