200 साल पुरानी विरासत जौनपुर का जकारिया परिवार सहेज रहा पारंपरिक इत्र उद्योग
जौनपुर,03अप्रैल ।यूपी के ऐतिहासिक शहर जौनपुर महर्षि यमदग्नि ऋषि तपोस्थली
जौनपुर की पहचान केवल उसकी तहजीब और संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का पारंपरिक इत्र उद्योग भी खास स्थान रखता है। इस विरासत को पिछले 200 से अधिक वर्षों से जकारिया परिवार सहेजता आ रहा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1805 में हुई थी। आज इस परंपरा को सातवीं पीढ़ी के रूप में आगे बढ़ा रहे।
परिवार के प्रतिनिधि इस समय इस अनूठे व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाल रहे
मोहम्मद मुस्तफा जकारिया ने शुक्रवार को देश की उपासना ब्यूरो प्रमुख से बात करते हुए कहा है कि इत्र बनाना उनके लिए केवल रोजगार नहीं, बल्कि उनकी पहचान और विरासत है। जौनपुर में तैयार होने वाला इत्र अपनी शुद्धता और गुणवत्ता के कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता है।
जकारिया परिवार आज भी इत्र निर्माण में पारंपरिक तरीकों को ही प्राथमिकता देता है। गुलाब, केवड़ा, चमेली और खस जैसे प्राकृतिक फूलों से आसवन (डिस्टिलेशन) प्रक्रिया के जरिए इत्र तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में समय और मेहनत दोनों अधिक लगते हैं, लेकिन यही इसकी खासियत भी है, जिससे इत्र की खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है।
मुस्तफा जकारिया ने बताया कि बदलते समय के साथ सोशल मीडिया ने उनके व्यवसाय को नई दिशा दी है। अब ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार तुरंत इत्र बनवाकर ले जाते हैं। इससे कारोबार को बढ़ावा मिला है और नए ग्राहकों तक पहुंच आसान हुई है।
हालांकि, उन्होंने सरकार से इस पारंपरिक उद्योग को बढ़ावा देने की मांग भी की है, ताकि इस कला से जुड़े लोग और अधिक सक्रिय हो सकें। जौनपुर का यह इत्र उद्योग आज भी अपनी पुरानी परंपराओं और गुणवत्ता के बल पर एक अलग पहचान बनाए हुए है। सरकार से मांग है कि जिस प्रकार उन्होंने जनपद की चर्चित इमरती को बढ़ावा दिया है उसी प्रकार इत्र पर ध्यान दें जिससे इस कौशल के द्वारा लोगों रोजगार भी प्राप्त हो सके।

