अयोध्या(संवाददाता) सुरेंद्र कुमार।रामनगरी के लिए यह सावन बहुत ही रही है। नागपंचमी के पर्व से शुक्रवार को रामलला के दरबार में भी झूलनोत्सव की छटा बिखरने लगेगी। 493 साल के बाद रामलला पहली बार चांदी के हिंडोले पर आसीन होंगे।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रामलला के लिए 21 किलो चांदी का पांच फीट ऊंचा भव्य झूला तैयार कराया गया है। जिसे गुरुवार को पूजन-अर्चन के बाद गर्भगृह में झूले को स्थापित करा दिया गया है।रामलला सहित चारों भाई शुक्रवार से झूले पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इसको लेकर रामनगरी के संत-धर्माचार्यों सहित भक्तों में उत्साह है।
रामनगरी के हजारों मंदिरों में हर वर्ष श्रावण झूलनोत्सव की परंपरा का निर्वहन सदियों से होता आ रहा है। टेंट में संगीनों के साए के बीच विराजमान रहे रामलला के दरबार में भी परंपरा निर्वहन सीमित स्तर पर होता आ रहा था।
25 मार्च 2020 को रामलला अस्थाई मंदिर में विराजित हुए बावजूद इसके वे झूलनोत्सव से वंचित थे। जिसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रामलला के लिए भव्य झूला निर्मित कराने का काम शुरू हुआ। श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि यह पहली बार होगा जब रामलला के दरबार में झूलन उत्सव की धूम होगी।झूले की डोर भी चांदी की है। कहा कि, सुबह आरती, पूजन के बाद जब मंदिर खुलेगा तो रामलला चांदी के झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।
झूले पर एक ऊंचे आसन पर रामलला को विराजित किया जाएगा। उनके नीचे भरत, लक्ष्मण व शत्रुहन भी विराजमान होंगे। कहा कि शुक्रवार को रामलला के दरबार में झूलनोत्सव की धूम होगी, प्रतिदिन शाम को एक घंटे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे ज.गु.रामदिनेशाचार्य कहते हैं कि राममंदिर निर्माण के साथ ही साथ रामनगरी का गौरव भी लौट रहा है। रामनगरी सनातन संस्कृति की संवाहक रही है। अब इसको एक नई ऊर्जा प्राप्त हो रही है। हम सबके आराध्य रामलला के दरबार में अब समय-समय पर उत्सव हो रहे हैं। हम इसके साक्षी बन रहे हैं, यह सुखद क्षण है।
महंत गिरीशपति त्रिपाठी कहते हैं कि चांदी के झूले पर विराजित रामलला का दर्शन करने की बेसब्री बयां नहीं कर सकते। श्रीराम हमारी आस्था के प्रधान केंद्र हैं। अयोध्या में अब रामभक्ति की डोर और भी मजबूत होगी।रामलला के दरबार में अब हर उत्सव भव्यता का पर्याय होगा। इसी के तहत शुक्रवार से मंदिर परिसर में झूलनोत्सव की छटा भी बिखरेगी। भक्तों की मंशा के अनुरूप रामलला को दिल्ली से 21 किलो चांदी का पांच फीट ऊंचा झूला निर्मित कराया गया है। जो अस्थाई मंदिर में स्थापित करा दिया गया है जहां पर पूजा-अर्चना होती रहेगी।

