श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

20 अप्रैल – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

जय राम रमा रमनं समनं,
भवताप भयाकुल पाहि जनं ।।
अवधेश सुरेश रमेस बिभो ।
सरनागत मागत पाहि प्रभो ।।
( उत्तरकांड, छंद)
जै जै सियाराम 🙏🙏
लंका से लौटने पर भगवान का राज्याभिषेक हुआ है, वेद स्तुति कर वापस गये हैं । श्री शिव जी आते हैं , वे स्तुति करते हुए कहते हैं । हे राम ! हे लक्ष्मीकांत ! हे जन्म मरण का कष्ट हरने वाले ! आपकी जय हो , आवागमन के भय से ब्याकुल इस सेवक की रक्षा कीजिए । हे अवधपति , हे देवताओं के स्वामी, हे विभो! मैं आपसे यही माँगता हूँ कि प्रभु !मेरी रक्षा कीजिए ।
आत्मीय जनों ! जो शिव जी ने श्री राम जी से माँगा, वही श्री राम जी का पूजा अर्चना करते समय हमें भी माँगना चाहिए कि हे श्री राम जी ! मेरी रक्षा कीजिए क्योंकि श्री राम जी द्वारा रक्षित होने पर सब कुछ सुरक्षित हो जाता है। अतएव श्री राम रक्षा पाने के लिए हम सभी को केवल एक ही प्रयास करना है, वो है सतत श्री सीताराम नाम भजन । अथ……. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जानकीवल्लभ राजाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम ।
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19 अप्रैल-श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏

छुअत सिला भइ नारि सुहाई ।
पाहन तें न काठ कठिनाई ।।
तरनिउ मुनि घरिनी होइ जाई ।
बाट परइ मोरि नाव उड़ाई ।।
( अयोध्याकाण्ड 99/3)
राम राम 🙏🙏
सुमंत्र जी को मना कर श्री राम जी गंगा तट पहुँचे हैं , केवट से नाव मांगते हैं, वह नहीं आता है, वह कहता है मैं आपका मर्म जानता हूँ । आपके छूते ही मेरी नाव स्त्री हो जाएगी और मेरी कमाई का साधन ख़त्म हो जाएगा, मैं लुट जाऊँगा ।
आत्मीय जन ! श्री राम स्पर्श होते ही जगत का लोप हो जाता है, आप साध्य को पा लेते हैं फिर श्रम करने की जरुरत नहीं रहती है । आप सब कुछ पा लेते हैं । श्री राम स्पर्श से जगत लुट जाए तो लुटने दें, जगदीश तो मिल जाएँगें । अतएव श्री राम जी का स्पर्श पाने के लिये सतत श्री सीताराम नाम भजन करना पड़ेगा……. श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम। सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
18 अप्रैल- श्रीरामचरितमानस,
नमो राघवाय 🙏

रघुबंस भूषन चरित यह,
नर कहहिं सुनहिं जे गावहीं ।
कलि मल मनोमल धोइ बिनु श्रम,
राम धाम सिधावहीं ।।
( उत्तरकांड , छंद 129)
राम राम जी 🙏🙏
श्री राम कथा पूर्ण करते हुए पूज्य पाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी कहते हैं कि जो मनुष्य रघुवंश के भूषण श्रीराम जी का चरित कहते, सुनते व गाते हैं , वे कलियुग के पाप और मन के मल को धोकर बिना परिश्रम के श्री राम जी के धाम जाते हैं ।
भक्तों, कलियुग के पापों से यदि आप बचना चाहते हैं, अपने मन को निर्मल करना चाहते हैं, श्री राम जी का साहचर्य चाहते हैं तो बस श्री राम जी का गुणगान करें , श्री रामजी का गुणगान सुनें व दूसरों को भी सुनाएँ तथा श्री सीताराम जी का नाम भजन निरन्तर करते रहें…… श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम । जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम संकलन तरुण जी लखनऊ
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