करोड़ों की कोडीनयुक्त कफ सिरप की बिक्री पर STF ने कसा शिकंजा, छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट

ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने करोड़ों रुपये के कोडीनयुक्त कफ सिरप सिंडिकेट मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में जीआर ट्रेडिंग के संचालक विभोर राणा समेत कई आरोपी लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर थे। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि मामले की जांच अभी भी जारी है।
एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की संयुक्त कार्रवाई में पिछले वर्ष इस अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ था। शुरुआती जांच में सामने आया कि सिंडिकेट संगठित तरीके से कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त कर रहा था। इसके बाद एजेंसियों ने बैंक खातों, दवा कंपनियों, व्यापारिक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच शुरू की।
जांच के दौरान चौंकाने वाले वित्तीय आंकड़े सामने आए। अधिकारियों के मुताबिक बीते चार वर्षों में नेटवर्क ने करीब 400 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि 1200 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध बिक्री का कारोबार संचालित किया गया। इस पूरे नेटवर्क में मारुति मेडिकोज के सचिन कुमार, एबी फार्मास्युटिकल के अभिषेक शर्मा समेत कई अन्य लोगों की भूमिका सामने आई है।
एसटीएफ के अनुसार आरोपी कथित तौर पर एबॉट कंपनी से कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़ी खेप खरीदते थे और बाद में इसे विभिन्न राज्यों में अवैध रूप से सप्लाई किया जाता था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि सिंडिकेट का नेटवर्क नेपाल और बांग्लादेश तक फैला हुआ था, जहां सीमापार अवैध तस्करी के जरिए दवाओं की सप्लाई की जाती थी।
जांच एजेंसियों ने सप्लाई चेन, पैसों की ट्रेल और तस्करी के रूट से जुड़े कई अहम सबूत जुटाए हैं। मामले में करोड़ों रुपये के बैंक ट्रांजैक्शन और संदिग्ध खातों की डिटेल भी विवेचना में शामिल की गई है। इसी मामले में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, अमित टाटा और विकास समेत अन्य आरोपी भी जेल में बंद हैं। अधिकारियों का कहना है कि इनके खिलाफ जल्द पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
एसटीएफ अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनके आधार पर आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं विदेश में मौजूद कथित सरगना शुभम जायसवाल, गौरव और वरुण सिंह को भारत लाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। जांच एजेंसियों ने इनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया है और पासपोर्ट निरस्त करने की कार्रवाई भी की गई है, ताकि आरोपी विदेश में छिपकर बच न सकें।
अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस नेटवर्क की हर कड़ी को खंगाला जा रहा है और मामले से जुड़े सभी आरोपियों को कानून के दायरे में लाने के लिए कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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