कोविड-19 का पालन करते हुए मनाया गया चेहल्लुम

अयोध्या।(सरवन कुमार नगर संवाददाता अयोध्या)
जिले के पूराकलंदर थाना क्षेत्र अंतर्गत मूसेपुर गांव मे हर साल की तरह इस साल भी इमाम हुसैन का चेहलुम मनाया गया।लेकिन महामारी और करोना की गाइडलाइन को देखते हुए इस साल जुलूस रोड पर नहीं लाया गया।करोना गाइडलाइन के अनुसार ही  चेहल्लुम मनाया गया।सूत्र के मुताबिक अब से 1400 वर्ष पूर्व इराक कर्बला की भूमि पर इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों की शहादत पेश की थी।हक इंसानियत दीन को बचाया था।शहादत के बाद जो लोग बचे थे उनको उस वक्त का क्रूर जालिम बादशाह यजीद ने बंदी बना लिया था और सब को कैद खाने में रखा था।उसी कैद खाने में इमाम हुसैन की 4 साल की बच्ची जनाबे सकीना ने मुसीबत और जुल्म की इंतेहा को सहते हुए इंतकाल कर गई थीं।बाद में यजीद ने सबको रिहा किया और सब को आजाद कर दिया। उसी वक्त रिहा होने के बाद इमाम हुसैन की बहन जनाबे  जै़नब ने पहली मजलिस की थी और अपने भाई सहित तमाम शहीदों का चेहल्लुम मनाया था।तब से अब तक उन्हीं की याद में पूरी दुनिया में गमगीन माहौल में चेहलुम मनाया जाता है।उसी कड़ी में आज जनपद अयोध्या के मसौधा ब्लाक अंतर्गत
मूसेपुर में चेहल्लुम मनाया गया।परंतु हर वर्ष की तरह इस वर्ष करोना महामारी को देखते हुए प्रोग्राम को उसी स्थान पर खत्म कर दिया गया है।जहां पर शुरू हुआ था।हालांकि महामारी से पहले हर साल जुलूस की शक्ल में गांव से निकलकर भरतकुंड चौराहे पर एक तकरीर के बाद मीराजै़ना गांव में जाकर ताजिया दफन किया जाता था पर इस साल ऐसा नहीं हुआ। गाइड लाइन के अनुसार जुलूस को वही खत्म कर मात्र 10 लोगों ने ताजिया ले जाकर मीराजै़ना में दफन किया।चेहल्लुम के प्रोग्राम में आलम ताजिए दुलदुल मौजूद रहे मुकामी अंजुमन के अलावा पड़ोस के जनपद सुलतान पुर की चार अंजुमनों ने शिरकत कर नौहा ख्वानी और सीना ज़नी की।इससे पहले एक हदीस को अनीस जायसी ने संबोधित किया जिसमें उन्होंने कर्बला के 72 शहीदों और  प्यासों का जि़क्र किया और कहा कि उन शहीदों ने कुर्बानी इसलिए दी कि दुनिया में हक इंसानियत मानवता बाकी रह सके।  चेहल्लुम का प्रोग्राम करीब 3:30 बजे प्रोग्राम खत्म हुआ और मात्र 10 लोग ही ताजिया लेकर कर्बला पहुंचकर ताजिए को दफन किया।चेहल्लुम के कार्यक्रम के दौरान पुलिस के आला अधिकारी ने पहुंचकर चेहल्लुम के इंतजामियां बृजेश बाबा से मुलाकात की और उनको करोना गाइडलाइन के बारे में बताते हुए कहा की इस कार्यक्रम को उसी परिसर में खत्म किया जाए और रोड पर जुलूस की शक्ल में ना आया जाए ताजियों को मात्र 10 लोग कर्बला ले जाकर दफन करें अधिकारियों के आदेश का पालन करते हुए ऐसा ही किया गया।

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