थायराइड की अनदेखी पड़ सकती है भारी, समय रहते जांच और इलाज जरूरी
विश्व थायराइड दिवस पर मेदांता अस्पताल में हुआ जागरूकता कार्यक्रम
महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है थायराइड की समस्या
लखनऊ (आर एल पाण्डेय)। विश्व थायराइड दिवस के अवसर पर मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग द्वारा लोगों को थायराइड संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जागरूकता के लिए बातचीत, प्रश्नोत्तर सत्र और निशुल्क थायराइड जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और थायराइड से जुड़ी समस्याओं, उनके लक्षणों और इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त की।
मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ में एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि थायराइड हमारे गले में मौजूद एक महत्वपूर्ण ग्रंथि होती है, जो शरीर के लिए जरूरी थायराइड हार्मोन बनाती है। यह हार्मोन शरीर की हर कोशिका के कामकाज के लिए बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि थायराइड की बीमारियां मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं फंक्शनल और स्ट्रक्चरल। जब शरीर में थायराइड हार्मोन कम बनने लगता है तो उसे हाइपोथायराइडिज्म कहा जाता है, जबकि हार्मोन ज्यादा बनने पर हाइपरथायराइडिज्म की समस्या होती है। वहीं गले में गांठ या गिल्टी बनने को स्ट्रक्चरल बदलाव माना जाता है।
हाइपोथायराइडिज्म में मरीज को थकान, वजन बढ़ना, पैरों में सूजन और दिनभर नींद आने जैसी समस्याएं होती हैं। इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। दूसरी ओर हाइपरथायराइडिज्म में वजन तेजी से कम होता है, गर्मी ज्यादा लगती है और मरीज कमजोर होने लगता है। कई मामलों में आंखें बाहर निकलने जैसी परेशानी भी देखी जाती है। यह समस्या 20 से 40 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा पाई जाती है।
मेदांता अस्पताल की एसोसिएट डायरेक्टर एंडोक्राइन एंड ब्रेस्ट सर्जरी डॉ. रोमा प्रधान ने बताया कि गले में किसी भी तरह की गांठ या सूजन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। ज्यादातर गांठें सामान्य होती हैं लेकिन कुछ मामलों में कैंसर की संभावना भी रहती है। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। अल्ट्रासाउंड और एफएनएसी जैसी जांचों से इसकी सही पहचान आसानी से हो जाती है।
अगर गांठ बड़ी हो जाए या सांस लेने और खाना निगलने में दिक्कत होने लगे तो ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है। थायराइड का ऑपरेशन हमेशा विशेषज्ञ डॉक्टर से ही कराना चाहिए क्योंकि थायराइड के पास आवाज की नस और पैराथायराइड ग्रंथियां होती हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है।
लोगों को आयोडाइज्ड नमक के इस्तेमाल की सलाह दी गई और बताया गया कि लंबे समय तक सेंधा नमक या कम आयोडीन वाले नमक का सेवन करने से थायराइड की बीमारी और गॉइटर का खतरा बढ़ सकता है। तनाव, प्रदूषण, केमिकल्स और पेस्टिसाइड्स भी थायराइड की समस्याओं को बढ़ाने वाले बड़े कारण बन रहे हैं।
थायराइड की दवाइयों को सही तरीके से लेना बेहद जरूरी है। दवा हमेशा सुबह खाली पेट केवल पानी के साथ लेनी चाहिए और दवा लेने के कम से कम आधे घंटे बाद तक कुछ खाना-पीना नहीं चाहिए। अधिकतर मामलों में थायराइड की दवा लंबे समय तक या जीवनभर लेनी पड़ती है।
अंत में डॉ. अमित अग्रवाल ने लोगों से अपील की कि थायराइड के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर जांच कराते रहें। उन्होंने कहा, “विश्व थायराइड दिवस 2026 की थीम ‘नो योर थायराइड’ लोगों को जागरूक करने का संदेश देती है। सही जानकारी, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर थायराइड की समस्याओं से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।”

