विश्व पर्यावरण दिवस पर नेशनल ज्योग्राफिक इंडिया प्रस्तुत करेगा ‘नीलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’
नेट जियो एक्सप्लोरर संदीश कादूर की पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री भारत के पहले यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व की अनूठी कहानी दर्शाएगी
लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नेशनल ज्योग्राफिक इंडिया दर्शकों को भारत की एक ऐसी प्राकृतिक धरोहर से रूबरू कराने जा रहा है, जो हमारे बेहद करीब होते हुए भी आज तक बड़े पैमाने पर अनदेखी रही है। नेशनल ज्योग्राफिक फेलो और पुरस्कार विजेता वन्यजीव फिल्म निर्माता संदीश कादूर की फीचर डॉक्यूमेंट्री ‘नीलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’ का प्रीमियर 5 जून को दोपहर 12 बजे और रात 9 बजे नेशनल ज्योग्राफिक चैनल पर होगा।
यह डॉक्यूमेंट्री पूरी तरह से नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व पर आधारित है, जो भारत का पहला यूनेस्को मान्यता प्राप्त बायोस्फीयर रिजर्व है और देश के सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक परिदृश्यों में से एक माना जाता है। फिल्म मनुष्य, वन्यजीवों और प्रकृति के बीच सदियों से विकसित होते आए सह-अस्तित्व और संतुलन की संवेदनशील कहानी प्रस्तुत करती है।
‘नीलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’ मानव और प्रकृति को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में नहीं, बल्कि एक साझा पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा मानती है। फिल्म में दर्शाया गया है कि किस प्रकार नीलगिरि की नीली पहाड़ियों में जीवन, वन्यजीव और स्थानीय समुदाय एक साथ विकसित हुए हैं और आज भी सामंजस्यपूर्ण रूप से अस्तित्व में हैं।
प्राचीन शोला वनों से गुजरती रेलवे लाइनों, विशाल चाय बागानों और वन्यजीव गलियारों के साथ बसे कस्बों के बीच यह डॉक्यूमेंट्री एक ऐसे भू-दृश्य को उजागर करती है, जिसे प्रकृति और सह-अस्तित्व दोनों ने समान रूप से आकार दिया है। यहां दुर्लभ वन्यजीव लगातार बदलते आवासों के बावजूद स्वयं को ढालते हुए जीवित हैं और मनुष्यों के साथ साझा स्थानों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
फिल्म निर्देशक और नेशनल ज्योग्राफिक फेलो संदीश कादूर ने कहा, “मैंने नीलगिरि क्षेत्र में वर्षों बिताए हैं और कई बार घंटों तक शांत बैठकर उन दुर्लभ क्षणों का इंतजार किया है, जो इस भूमि की वास्तविक आत्मा को सामने लाते हैं। सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात यहां इंसानों और वन्यजीवों का अद्भुत सह-अस्तित्व था। सुबह के समय चाय बागानों में घूमते तेंदुए हों या व्यस्त कस्बों में सहज रूप से विचरण करते गौर, यह सब इस साझा जंगल की कहानी कहते हैं। इस फिल्म के माध्यम से मैं दर्शकों को नीलगिरि की सुंदरता, जटिलता और संवेदनशीलता का अनुभव कराना चाहता था। नेशनल ज्योग्राफिक जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इसका प्रसारण मेरे लिए बेहद विशेष और भावनात्मक क्षण है।”
रोहिणी निलेकणी फिलैंथ्रॉपीज़ की चेयरपर्सन एवं कार्यकारी निर्माता रोहिणी निलेकणी ने कहा, “नीलगिरि हमेशा से आश्चर्य और प्रेरणा का स्रोत रहा है। यहां प्राचीन वन, समृद्ध जैव विविधता और मानव समुदाय एक अनूठे संतुलन में साथ रहते हैं। इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से हम इस अद्भुत दुनिया को भारत के हर नागरिक तक पहुंचाना चाहते हैं। नेशनल ज्योग्राफिक इंडिया के साथ यह साझेदारी हमारे लिए सम्मान की बात है। यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला एक सशक्त संदेश है।”
जियोस्टार में हिंदी एवं इंग्लिश एंटरटेनमेंट बिजनेस (स्ट्रीमिंग, टीवी एवं स्टूडियोज) के प्रमुख आलोक जैन ने कहा, “नेशनल ज्योग्राफिक इंडिया हमेशा ऐसी कहानियां प्रस्तुत करने में विश्वास रखता है जो दर्शकों को दुनिया से गहराई से जोड़ती हैं। ‘नीलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’ इसी सोच का विस्तार है। यह डॉक्यूमेंट्री वन्यजीवन को किसी दूरस्थ या अछूती दुनिया के रूप में नहीं, बल्कि मनुष्यों और प्रकृति के बीच विकसित हो रहे रिश्ते के रूप में प्रस्तुत करती है। यह दर्शकों को प्रकृति को अधिक संवेदनशीलता, जिज्ञासा और समझ के साथ देखने के लिए प्रेरित करती है।”
संदीश कादूर ने वर्षों की मेहनत और धैर्य के साथ इस परिदृश्य के ऐसे दृश्य कैमरे में कैद किए हैं, जो दर्शकों को रोमांच और विस्मय दोनों का अनुभव कराते हैं। यह फिल्म वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित जैक्सन वाइल्ड मीडिया अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट साउंड’ पुरस्कार भी जीत चुकी है, जिसे प्रकृति और विज्ञान आधारित फिल्म निर्माण के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
‘नीलगिरिस: ए शेयर्ड वाइल्डरनेस’ का प्रीमियर 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस पर दोपहर 12 बजे और रात 9 बजे नेशनल ज्योग्राफिक इंडिया पर प्रसारित किया जाएगा।
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