नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में ‘हमारा लक्ष्य’ विषय पर हुआ चिंतन

नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में ‘हमारा लक्ष्य’ विषय पर हुआ चिंतन

 

हरदोई। जनपद के अल्लीपुर स्थित पं. बाबूराम त्रिवेदी सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस पर विभिन्न विषयों पर शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर रहे।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। अतिथियों का रोली एवं बैच लगाकर स्वागत किया गया। मंच संचालन मैगलगंज के प्रधानाचार्य उत्तम मिश्र ने किया, जबकि अतिथियों का परिचय जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक मिथिलेश अवस्थी ने कराया। अल्लीपुर डिग्री कॉलेज के प्राचार्य शशिकांत पांडेय ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

 

प्रथम एवं द्वितीय सत्र में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर ने “हमारा लक्ष्य” विषय पर अत्यंत प्रेरणादायी एवं चिंतनपरक सत्र लिया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन को मुख्य रूप से दो शक्तियां नियंत्रित करती हैं—शिक्षा और धर्म। शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करती है, जबकि धर्म उसके जीवन में करुणा, संवेदना और नैतिक मूल्यों का विकास करता है। उन्होंने कहा कि आज के तकनीकी युग में गूगल और मोबाइल सूचनाएं तो दे सकते हैं, लेकिन संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों का संचार केवल शिक्षक ही कर सकता है।

 

उन्होंने कहा कि आचार्य होना केवल एक पद या व्यवसाय नहीं, बल्कि एक विचार और जीवन पद्धति है। समाज आचार्य से केवल विषय ज्ञान की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि उसके आचरण, व्यक्तित्व और आदर्शों से भी प्रेरणा प्राप्त करता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को स्वयं को निरंतर विकसित करते हुए विद्यार्थियों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।

 

डॉ. राम मनोहर ने भारतीय संस्कृति और धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म किसी संप्रदाय विशेष का नाम नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली व्यवस्था है। धर्म व्यक्ति के भीतर कर्तव्यबोध, अनुशासन और सेवा का भाव उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना की बात कही थी और यह स्थापना किसी भवन या स्थान पर नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में होती है।

 

उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को विद्या भारती के “हमारा लक्ष्य” का महत्व समझाते हुए कहा कि यह केवल कुछ पंक्तियां नहीं, बल्कि संगठन की आत्मा और कार्य की दिशा है। लक्ष्य को समझे बिना शिक्षा के उद्देश्य को पूर्ण रूप से नहीं समझा जा सकता। उन्होंने विशेष पद्धति से उंगलियों के माध्यम से लक्ष्य का अभ्यास कराया और सभी प्रशिक्षणार्थियों को इसे कंठस्थ करने के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में अधिकांश प्रशिक्षणार्थियों ने लक्ष्य को स्मरण भी कर लिया।

 

उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का अध्यापन करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का शिल्पी होता है। उसके द्वारा तैयार की गई युवा पीढ़ी ही भविष्य में राष्ट्र के चरित्र, संस्कृति और विकास की दिशा निर्धारित करती है। इसलिए प्रत्येक आचार्य को राष्ट्रभक्ति, सेवा, समरसता और संस्कारों से युक्त शिक्षा प्रदान करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने सभी को “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो” के उद्घोष के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराया।

 

प्रशिक्षण वर्ग में कक्षा शिक्षण के अंतर्गत संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल ने गणित, संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह ने सामाजिक विज्ञान, आशुतोष तिवारी ने अंग्रेजी, अतुल अवस्थी ने विज्ञान तथा दीपक पांडेय ने हिंदी विषय का शिक्षण प्रशिक्षण प्रदान किया।

 

इस अवसर पर जन शिक्षा समिति अवध प्रदेश के उपाध्यक्ष एवं विद्यालय प्रबंधक शीर्षेन्दुशील त्रिवेदी, वर्गाधिकारी संतोष त्रिवेदी, लखनऊ संभाग निरीक्षक श्याम मनोहर शुक्ल, सीतापुर संभाग निरीक्षक रणवीर सिंह, श्रावस्ती संभाग निरीक्षक कैलाश चंद्र वर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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