ट्रस्ट व सरकार कर रही महासचिव चंपत राय सहित अन्य आरोपियों की बचाव – पवन पाण्डेय
(राजन तिवारी सिटी रिपोर्टर)
अयोध्या।राम मंदिर चंदा घोटाला कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है बल्कि करोड़ो राम भक्तों के आस्था से खिलवाड़ है।ट्रस्ट व सरकार इसमें शामिल सभी दोषियों को सजा न देकर बल्कि घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। जबकि घोटाले मे मुख्य आरोपी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अलावा गोपाल राव तथा डॉक्टर अनिल मिश्रा है, लेकिन अभी तक इन पर जांच की आंच नहीं आई है।यह आरोप लगाते हुए सोमवार को शहर के सिविल लाइन स्थित एक होटल में सपा पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे पवन ने कहा कि जब 5 जून को अविनाश शुक्ला से पैसे बरामद हुए थे तब ट्रस्ट सक्रियता दिखाते हुए इस घटना की मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराई।जेल में बंद आठों आरोपी सिर्फ दिखावा मात्र के ही हैं।जबकि मुख्य आरोपी जो इस घटना में शामिल हैं खासकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, गोपाल राव तथा डॉक्टर अनिल मिश्रा के ऊपर अभी तक कार्यवाही तो छोड़िए सीट की टीम ने इसे पूछताछ तक नहीं किया।उन्होंने कहा कि ट्रस्ट इन तीनों आरोपियों को साफ-साफ बचना चाहती है जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आखिर ट्रस्ट की मीटिंग 11 जुलाई को ही क्यों अगर मीटिंग करनी ही है।तो यह कोई छोटी घटना नहीं है बड़ी घटना है और इसका पटाक्षेप शीघ्र से शीघ्र हो।इसमें शामिल सभी आरोपी पर कार्यवाई हो।इसके लिए ट्रस्ट को शीघ्र मीटिंग करनी चाहिए लेकिन ट्रस्ट ऐसा नहीं कर रहा है जिससे यह साबित हो रहा है ट्रस्ट इन तीनों को बचाना चाहती है। क्योंकि जितना लंबा यह मामला खींचेगा उसे बीच आरोपियों को सबूत मिटाने में सरलता होगी।उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच का गठन सिर्फ जनता को गुमराह करना है। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि सिर्फ आठों आरोपियों के जेल जाने के बाद ही पुलिस मीडिया को बुलाकर इन आठों आरोपियों के घर जांच के नाम पर ड्रामा कर रही है।अगर जांच करनी थी तो उससे पहले क्यों नहीं हुई और जांच में क्या निकला यह भी पुलिस नहीं बताई। उन्होंने चंपत राय तथा डॉक्टर अनिल मिश्रा के इस्तीफा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कि अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ 11 जुलाई की बैठक के बाद ही ट्रस्ट निर्णय लेगा कि इस्तीफा मंजूर हो कि नहीं। उन्होंने कहा कि इन दोनों पदाधिकारी ने इस्तीफा किस बात को लेकर दिया।इसे सार्वजनिक रूप से जनता के सामने ट्रस्ट के को पेश करना चाहिए।लेकिन ट्रस्ट ऐसा नहीं कर रही है।कहा कि सरकार और ट्रस्ट मिलकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि एसआईटी जांच जनता को गुमराह कर रही है।उनका कहना है कि इस जांच से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है।उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा कि उन्हें एसआईटी व सरकार पर भरोसा नहीं है।यह करोड़ो देशवासियों की आस्था का सवाल है,इसलिए इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय खुद संज्ञान मे इसकी निष्पक्ष जांच करे।यही उनकी मांग है।

