बारिश ने खोली प्रशासन की पोल! वसई-विरार की सड़कों का बुरा हाल। जलभराव के बीच मनसे नेता उपेन्द्र गुप्ता ने संभाला मोर्चा

भोईदापाड़ा से नायगांव तक जलभराव ने बढ़ाई मुश्किलें, बाघरालपाड़ा में जहरीले पानी के बीच मनसे नेता उपेंद्र गुप्ता ने संभाला मोर्चा

देश की उपासना समाचार पत्र

मुम्बई ब्यूरो चीफ़ धनन्जय विश्वकर्मा

वसई-विरार: लगातार हो रही बारिश के कारण वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र के भोईदापाड़ा से नायगांव तक व्यापक जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जलजमाव और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से बाघरालपाड़ा जाने वाले मार्ग पर स्थित डंपिंग ग्राउंड से निकल रहे केमिकल युक्त दूषित पानी के तेज बहाव ने सड़क को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे वह नाले का रूप ले चुकी है और लोगों का आवागमन अत्यंत जोखिमपूर्ण हो गया है।

 

इसी दौरान महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बाघरालपाड़ा शाखा अध्यक्ष उपेंद्र गुप्ता स्वयं मौके पर पहुंचे और आश्रम के समीप जलभराव वाले गड्ढे में खड़े होकर लोगों का हाथ पकड़कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में मदद की। उन्होंने बाघरालपाड़ा, मनीषापाड़ा और भूतबंगला क्षेत्र के निवासियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली तथा खराब मौसम के दौरान अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी।

 

क्षेत्र के कई स्थानों पर नालों के ऊपर से पानी बहने और सड़कों पर गहरे गड्ढे होने के कारण आवागमन बेहद कठिन और खतरनाक हो गया है। ऐसे हालात में उपेंद्र गुप्ता विभिन्न स्थानों पर लोगों की सहायता करते हुए नजर आए।

उपेंद्र गुप्ता ने कहा कि “जनता की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। सरकार और वसई-विरार महानगरपालिका को चाहिए कि नालों और सड़कों की तत्काल मरम्मत कराकर स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।” उन्होंने बताया कि आज भी बाघरालपाड़ा से विकास सिटी तक जाने के लिए पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है, जिससे लोगों को कच्चे और जोखिमभरे रास्ते से आवागमन करना पड़ता है। इस समस्या का सबसे अधिक असर बुजुर्गों, बच्चों, छात्रों और कामकाजी लोगों पर पड़ रहा है।

 

उन्होंने महानगरपालिका पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि इस समस्या को लेकर पहले ही वसई-विरार महानगरपालिका कार्यालय में लिखित आवेदन दिया गया था। यदि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की गई होती, तो आज क्षेत्र की जनता को इतनी गंभीर परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने इस स्थिति के लिए महानगरपालिका प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।

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