रामघाट का आधुनिक शवदाह गृह 12 साल से बंद,3 करोड़ की लागत से बना, कफन रखने में हो रहा इस्तेमाल

रामघाट का आधुनिक शवदाह गृह 12 साल से बंद,3 करोड़ की लागत से बना, कफन रखने में हो रहा इस्तेमाल

 

 

जौनपुर गोमती नदी के किनारे स्थित रामघाट पर बना आधुनिक शवदाह गृह पिछले 12 सालों से निष्क्रिय पड़ा है। वर्ष 2014 में तीन करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित इस शवदाह गृह में आज तक एक भी चिता नहीं जली है। वर्तमान में इसका उपयोग कफन और अन्य सामग्री रखने के लिए किया जा रहा है, और इसके सिस्टम में जंग लग गई है।

रामघाट पर जौनपुर और आजमगढ़ जैसे दूरदराज के क्षेत्रों से भी लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 40 शवों का अंतिम संस्कार होता है, जिसके लिए लोगों को लकड़ी खरीदकर पारंपरिक चिता सजानी पड़ती है। घाट पर चिमनी वाले आधुनिक शवदाह गृह का शिलापट्ट देखकर लोग अक्सर इसकी निष्क्रियता पर सवाल उठाते हैं।

रामघाट सेवा समिति के घाट प्रभारी रतन सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2014 में दो चिमनी वाले शवदाह गृह बनाए गए थे। इनका मुख्य उद्देश्य कम लकड़ी का उपयोग कर शवों का अंतिम संस्कार करना था। हालांकि, चिमनी वाले शवदाह गृह में लकड़ी ठीक से न जल पाने के कारण यह व्यवस्था कभी शुरू नहीं हो पाई। उस समय जांच की बात कही गई थी, लेकिन उसका परिणाम आज तक सामने नहीं आया। सामान्य चिता में जहां लगभग दो क्विंटल लकड़ी लगती है, वहीं आधुनिक शवदाह गृह में एक क्विंटल लकड़ी में शवदाह का दावा किया गया था।

 

घाट के डोमराजा राम मूरत चौधरी और सूरज चौहान ने पुष्टि की कि मशीन लगने के बाद से यह एक दिन भी नहीं चली है। उन्होंने जिम्मेदारों पर इस महत्वपूर्ण स्थल की उपेक्षा का आरोप लगाया। इस संबंध में जिलाधिकारी सैमुअप पॉल एन ने कहा कि नगर पालिका से जानकारी ली जाएगी और जल्द से जल्द मशीन चालू कराई जाएगी।

 

नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन दिनेश टंडन ने बताया कि चिमनी वाले शवदाह गृह का निर्माण लावारिस और गरीब तबके के लोगों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से किया

गया था।

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