ब्यूरो चीफ/सत्य प्रकाश उपाध्याय
गाजियाबाद समेत पूरे उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के बिजली भार (लोड) को लेकर नया विवाद सामने आया है। बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली कंपनियों ने बिना पूर्व सूचना दिए उनके कनेक्शन का स्वीकृत लोड बढ़ा दिया, जिसके कारण उन्हें हर महीने अधिक फिक्स चार्ज और अन्य शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है। वहीं, बिजली की खपत कम होने के बाद भी लोड स्वतः कम नहीं किया जाता, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है।
प्रदेश में करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। बिजली विभाग लगातार तीन महीनों की अधिकतम बिजली खपत के आधार पर उपभोक्ता का स्वीकृत बिजली भार तय करता है। नियमानुसार लोड बढ़ाने से पहले उपभोक्ता को सूचना देना आवश्यक है, लेकिन कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें इसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई। उन्हें बढ़े हुए लोड की जानकारी बिजली बिल मिलने के बाद हुई।
लोड कम कराने की प्रक्रिया बनी परेशानी
उपभोक्ताओं का कहना है कि जब उनकी बिजली खपत कम हो जाती है, तब विभाग स्वतः लोड कम नहीं करता। इसके लिए आवेदन देना, आवश्यक दस्तावेज जमा करना और कई मामलों में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। कई बार मीटर रीडर की रिपोर्ट के अभाव में आवेदन लंबित भी हो जाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बिजली उपकेंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
47 लाख उपभोक्ताओं का बढ़ाया गया बिजली भार
हाल ही में प्रदेश के करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का स्वीकृत बिजली भार बढ़ाया गया है। इनमें लगभग आधे स्मार्ट मीटर और आधे सामान्य मीटर वाले उपभोक्ता शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद कई उपभोक्ता संगठनों ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि यदि विभाग खपत के आधार पर स्वतः लोड बढ़ा सकता है, तो खपत कम होने पर उसे स्वतः घटाने की व्यवस्था भी लागू की जानी चाहिए।
पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा का कहना है कि बिजली भार का सही आकलन करना आवश्यक है, ताकि ट्रांसफार्मरों और अन्य विद्युत संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। उनके अनुसार यदि कोई उपभोक्ता लोड कम कराने के लिए आवेदन करता है और जांच में उसकी मांग उचित पाई जाती है, तो बिजली भार घटा दिया जाता है। साथ ही अतिरिक्त जमा सुरक्षा राशि पर नियमानुसार ब्याज भी दिया जाता है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाई पारदर्शिता की मांग
विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं का लोड तकनीकी आधार पर बढ़ाया जा सकता है, लेकिन सामान्य मीटर वाले उपभोक्ताओं के मामले में पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। परिषद ने बिजली कंपनियों से मांग की है कि सॉफ्टवेयर में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे बिजली की खपत कम होने पर स्वीकृत लोड भी स्वतः घट सके। इससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी और उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।
फिक्स चार्ज की दरें
शहरी क्षेत्र: 1 किलोवाट पर 110 रुपये प्रतिमाह
ग्रामीण क्षेत्र: 1 किलोवाट पर 90 रुपये प्रतिमाह
बीपीएल उपभोक्ता: 1 किलोवाट पर 50 रुपये प्रतिमाह

