जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा और आर्थिक आधार पर सहायता की मांग: भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
पत्रकार विनोद कुमार सिंह
लखनऊ। भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने देश में लागू जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की व्यापक एवं निष्पक्ष समीक्षा करने तथा आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद नागरिकों के लिए पारदर्शी सहायता व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। इस संबंध में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (उत्तर प्रदेश) इं. रमाकान्त पाण्डेय (आर. के. पाण्डेय) के नेतृत्व में जिला कलेक्टर, लखनऊ के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि स्वतंत्रता के 75 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद वर्तमान परिस्थितियों में आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव, इसकी आवश्यकता और परिणामों का पुनर्मूल्यांकन करना बेहद जरूरी है। इससे संविधान में निहित समानता, सामाजिक न्याय और समान अवसर के आदर्शों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
पार्टी की प्रमुख मांगें:
उच्चस्तरीय समीक्षा: जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की एक उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र आयोग से व्यापक समीक्षा कराई जाए।
चरणबद्ध बदलाव: समीक्षा के आधार पर जाति आधारित आरक्षण को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने पर विचार करते हुए केवल आर्थिक रूप से कमजोर और वास्तविक जरूरतमंदों के लिए पारदर्शी सहायता व्यवस्था लागू की जाए।
योग्यता और मेरिट को प्राथमिकता: शिक्षा, सरकारी नौकरियों एवं अन्य सार्वजनिक अवसरों में चयन प्रक्रिया को योग्यता, मेरिट एवं समान अवसर के सिद्धांतों पर आधारित बनाया जाए।
प्रत्येक 10 वर्ष में समीक्षा: आरक्षण व्यवस्था तथा उसके सामाजिक, आर्थिक एवं प्रशासनिक प्रभावों की हर 10 वर्ष में स्वतंत्र आयोग द्वारा समीक्षा अनिवार्य की जाए।
भारतीय जन मोर्चा पार्टी ने राष्ट्रहित एवं संविधान की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर आवश्यक और उचित कार्रवाई करने का निवेदन किया है।

