नई दिल्ली)रिंग में हुई बेईमानी और 11 साल का दर्द.. बिस्तर पर जिंदगी से जंग हार गया ये दिग्गज बॉक्सर, 33 की उम्र में तोड़ा दम

नई दिल्ली)रिंग में हुई बेईमानी और 11 साल का दर्द.. बिस्तर पर जिंदगी से जंग हार गया ये दिग्गज बॉक्सर, 33 की उम्र में तोड़ा दम

नई दिल्ली ,14 अगस्त ,। खेल की दुनिया से एक बेहद ही रुला देने वाली खबर सामने आई है। जिस मुक्केबाज के खूंखार पंच से रिंग में अच्छे-अच्छे विरोधी कांप उठते थे, वह पिछले 11 सालों से एक बिस्तर पर खामोश पड़ा था। साल 2015 में बॉक्सिंग रिंग में हुई एक भयानक और विवादित घटना ने पुएर्टो रिको के स्टार बॉक्सर प्रिचार्ड कोलन की पूरी जिंदगी तबाह कर दी थी। मौत को चकमा देकर सालों तक अपनी सांसों के लिए लड़ने वाले इस 33 वर्षीय पूर्व मुक्केबाज ने अब दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। उनके निधन की खबर से बॉक्सिंग जगत में मातम छा गया है।

पिता का छलका दर्द, अधूरी रह गई आखिरी ख्वाहिश

प्रिचार्ड कोलन के पिता रिचर्ड कोलन ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट के जरिए अपने बेटे के निधन की दुखद जानकारी दुनिया के साथ साझा की है। उन्होंने भारी मन से बताया कि वे अपने बेटे की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने की जी-तोड़ कोशिश कर रहे थे, लेकिन दुर्भाग्य से वे ऐसा नहीं कर सके। इस भयानक दुख की घड़ी में पिता ने उन तमाम फैंस का दिल से शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इतने सालों तक परिवार को बेशुमार प्यार और दुआएं दीं। कोलन की मां और उनके पूरे परिवार ने पिछले 11 सालों तक साये की तरह उनकी दिन-रात देखभाल की थी।

2015 की वो मनहूस रात और रिंग में हुई खौफनाक घटना

प्रिचार्ड कोलन का बॉक्सिंग करियर किसी सुनहरे सपने जैसा था और वे तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे थे। अक्टूबर 2015 में टेरेल विलियम्स के खिलाफ रिंग में उतरने से पहले वे पूरी तरह से अजेय थे। उन्होंने लगातार 16 मुकाबले जीते थे, जिनमें से 13 बार तो विरोधियों को नॉकआउट कर दिया था। लेकिन टेरेल विलियम्स के खिलाफ खेला गया वह मैच उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा काल बन गया। मैच के दौरान विलियम्स ने नियमों को ताक पर रखकर कोलन के सिर के पिछले हिस्से पर कई खतरनाक पंच मारे। कोलन ने रेफरी से इसकी गुहार भी लगाई, लेकिन रेफरी ने अनसुना कर दिया और मैच जारी रहा। नौवें राउंड में कोलन दर्द से कराहते हुए नीचे गिर पड़े। इस बीच उनके कॉर्नर स्टाफ ने गलतफहमी में उनके दस्ताने उतार दिए, जिसके चलते उन्हें तकनीकी रूप से डिस्क्वालिफाई कर दिया गया।

ड्रेसिंग रूम में बिगड़ी तबीयत और 221 दिन का कोमा

रिंग में हुए उस जानलेवा हमले का असली असर ड्रेसिंग रूम में पहुंचने के बाद दिखा। वहां लौटते ही कोलन की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, उन्हें उल्टियां हुईं और वे बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में पता चला कि उनके दिमाग में भयंकर ब्लीडिंग हो रही है। दिमाग की सूजन और दबाव कम करने के लिए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की, लेकिन इसके बाद कोलन 221 दिनों तक कोमा में चले गए। कोमा से बाहर आने के बाद भी मस्तिष्क को हुए भारी नुकसान के कारण वे कभी सामान्य जीवन में नहीं लौट सके और ‘वेजिटेटिव स्टेटÓ में पहुंच गए। उनकी आवाज चली गई थी और वे बात करने के लिए कंप्यूटर का सहारा लेते थे। वर्ल्ड बॉक्सिंग ऑर्गनाइजेशन (ङ्खक्चह्र) ने इस महान योद्धा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि प्रिचार्ड कोलन की हिम्मत और जुझारू भावना रिंग की सीमाओं से परे थी और उनका संघर्ष हमेशा याद रखा जाएगा।

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(मॉन्ट्रियल)बेन शेल्टन ने लगातार दूसरी बार जीता कैनेडियन ओपन, जोकोविच और नडाल के खास क्लब में हुए शामिल

मॉन्ट्रियल ,14 अगस्त ,। अमेरिका के बेन शेल्टन ने लगातार दूसरी बार कैनेडियन ओपन का खिताब जीत लिया है। गुरुवार को मॉन्ट्रियल में खेले गए फाइनल मुकाबले में शेल्टन ने हमवतन पांचवीं सीड ब्रैंडन नाकाशिमा को 6-3, 7-6(4) से खिताब जीता। शेल्टन का यह दूसरा एटीपी मास्टर्स 1000 खिताब है।

बेन शेल्टन खिताबी जीत के साथ ही इस सदी में एंडी मरे (2009-10), नोवाक जोकोविच (2011-12), और राफेल नडाल (2018-19) के बाद अपने कनाडा ओपन खिताब को सफलतापूर्वक डिफेंड करने वाले चौथे व्यक्ति बन गए। शेल्टन बिना कोई सेट गंवाए खिताब जीता।

खिताबी जीत के बाद बेन शेल्टन ने कहा, इस सप्ताह जिस तरह से मैंने खेला और इस ड्रॉ तक पहुंचा, वह मेरी मेहनत को दिखाता है। यह मेरी मानसिक दृढता, इस सप्ताह जो कुछ भी हो रहा था, उस पर फोकस करने की मेरी क्षमता को भी दिखाता है।

एक घंटे 27 मिनट में अपनी जीत पक्की करने के लिए एक जबरदस्त फोरहैंड विनर लगाने के बाद, शेल्टन अपने प्लेयर बॉक्स की तरफ मुस्कुराए और कोर्ट की तरफ इशारा किया। इसके बाद कोर्ट पर वापस आकर शेल्टन ने जीत की खुशी में हुंकार भरी। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार को गले लगाया और उनके साथ इस पल का जश्न मनाया। 23 साल के शेल्टन का लगातार दूसरी बार कनाडा ओपन जीतना टेनिस की दुनिया में एक बड़े स्टार के उदय का संकेत है।

मॉन्ट्रियल में साथी अमेरिकी नाकाशिमा को हराकर, शेल्टन ने इस सीजन में अपना चौथा खिताब जीता। इससे पहले 2026 में डलास, म्यूनिख और स्टटगार्ट में वे जीत हासिल कर चुके हैं। अमेरिकी खिलाड़ी के नाम अब सात एटीपी टूर खिताब हैं।

नाकाशिमा अपने पहले मास्टर्स 1000 फाइनल में हिस्सा ले रहे थे और अपना दूसरा एटीपी टूर टाइटल जीतने की कोशिश कर रहे थे। नाकाशिमा ने अपना पहला खिताब 2022 में सैन डिएगो में जीता था।

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(नई दिल्ली)मेरा आखिरी विश्व कप हो सकता है, पदक का सूखा खत्म करने का इरादा : मनप्रीत सिंह

नई दिल्ली ,14 अगस्त ,। भारतीय हॉकी टीम के अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने कहा है कि एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 उनके करियर का आखिरी विश्व कप हो सकता है। मनप्रीत ने कहा कि वह विश्व कप को जीतकर इसे यादगार बनाना चाहते हैं। मनप्रीत ने जियोस्टार पर कहा, यह विश्व कप मेरे लिए बहुत मायने रखता है। यह मेरा चौथा विश्व कप है। हमने लगातार दो ओलंपिक पदक जीते हैं, लेकिन विश्व कप पदक अभी भी बाकी है। हर खिलाड़ी का सपना होता है कि दोनों हों। मेरे लिए, यह मेरा आखिरी विश्व कप हो सकता है, इसलिए मैं इसी सोच के साथ इसे खेल रहा हूं। मैंने वह हासिल करने का पक्का इरादा कर लिया है जो हमने अभी तक नहीं किया है। उन्होंने कहा, टीम के पास आगे बढ़ने के लिए अनुभव और प्रतिभा है। हमने अच्छी तैयारी की है, और भरोसा बहुत है। भारतीय खेल हर जगह आगे बढ़ रहे हैं। हॉकी भी अलग नहीं है। हमने ओलंपिक पदक जीते हैं, और अब वर्ल्ड कप में आगे बढ़ने का समय है।

मनप्रीत ने कहा, मुझे इस टीम पर पूरा भरोसा है। हमारी टीम में युवा और अनुभव का अच्छा बैलेंस है। हमारे कप्तान हरमनप्रीत सिंह, मंदीप सिंह और मैंने युवा खिलाड़ियों के साथ अपनी सीख साझा की है कि क्या काम किया, क्या नहीं, और हर मैच को पूरे फोकस के साथ कैसे खेलना है। टूर्नामेंट में हर मैच जरूरी है। हमें सही मनोदशा के साथ उतरना होगा, हर विपक्षी का सम्मान करना होगा और जीतने के लिए खेलना होगा। हमारे कोच ने फिटनेस पर जोर दिया है क्योंकि हम जानते हैं कि फिट रहने से हमें श्रेष्ठ के खिलाफ मुकाबला करने में मदद मिलती है। हमने अपने डिफेंस पर भी कड़ी मेहनत की है। एक मजबूत डिफेंस हमें अटैक करने और गेम पर नियंत्रण रखने का आत्मविश्वास देता है।

कप्तान हरमनप्रीत सिंह के बारे में मनप्रीत ने कहा कि वह एक बेहतरीन कप्तान हैं। वह आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व करते हैं और फील्ड पर सभी का मार्गदर्शन करते हैं। वह मुश्किल समय में खिलाड़ियों को प्रेरित भी करते हैं और दबाव में टीम को शांत रखते हैं। गेम को पढ़ने की उनकी क्षमता बेहतरीन है। उनकी पासिंग रेंज, चाहे लॉन्ग ओवरहेड्स हों या ग्राउंड पास, शानदार है।

उन्होंने कहा, वह अच्छी तरह संवाद करते हैं और डिफेंस को असरदार तरीके से व्यवस्थित करते हैं। वह दुनिया के बेस्ट ड्रैग-फ्लिकर्स में से एक हैं। उनके हिट्स में जबरदस्त ताकत और विविधता है, और जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तो वह हमेशा आगे आते हैं। उनके जैसा कप्तान होने से पूरी टीम को आत्मविश्वास मिलता है।

मनप्रीत को भरोसा है कि इंडिया फाइनल में पहुंचेगी और ऐतिहासिक सफलता की उम्मीद रखती है।

भारतीय टीम हॉकी विश्व कप 1975 में आखिरी बार पदक जीती थी। टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 में लगातार दो ओलंपिक पदक जीतने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद है कि हॉकी विश्व कप 2026 में पदक का 51 साल का सूखा समाप्त होगा।

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(टोरंटो)कैनेडियन ओपन: इगा स्वियाटेक ने जीता महिला एकल का खिताब, एलेना रायबाकिना 6-2, 6-3 से हारीं

टोरंटो ,14 अगस्त ,। पौलेंड की इगा स्वियाटेक ने कैनेडियन ओपन 2026 महिला एकल का खिताब जीत लिया है। टोरंटो में खेले गए फाइनल मुकाबले में स्वियाटेक ने कजाकिस्तान की एलेना रायबाकिना को 6-2, 6-3 से हराकर खिताब अपने नाम किया। स्वियाटेक का इस सीजन का यह पहला खिताब है। टूर्नामेंट में जारी अपने शानदार फॉर्म को बरकरार रखते हुए पोलैंड की सातवीं सीड खिलाड़ी स्वियाटेक ने पहले सेट में ही बढ़त बना ली थी, जबकि दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी रायबाकिना ने लगातार दो डबल फॉल्ट पर ब्रेक पॉइंट गंवा दिया। स्वियाटेक के पहला सेट जीतने के लिए रायबाकिना की यह गलती काफी थी। दूसरे सेट में भी रायबाकिना को अपनी गलतियों का नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने दो मिस्ड बैकहैंड ने स्वियाटेक को एक और ब्रेक दिया। रयाबाकिना एक चैंपियनशिप पॉइंट बचाने में कामयाब रहीं, लेकिन स्वियाटेक ने पिछले सितंबर के बाद से अपना पहला खिताब हासिल करने के लिए दूसरे मौके को भुना लिया।

स्वियाटेक के लिए यह जीत बेहद अहम है। यूएस ओपन की तैयारी कर रही स्वियाटेक का इस जीत के बाद आत्मविश्वास बढ़ेगा।

लंबे समय से कोई खिताब न जीत पाने के कारण आलोचन का सामना कर रहीं स्वियाटेक ने खिताबी जीत के बाद कहा कि यह खिताब मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि पिछले कुछ महीने बिल्कुल भी आसान नहीं रहे हैं। मैं बहुत खुश हूं कि मैंने आगे बढ़ने, अपने गेम को थोड़ा बदलने, इंटरनेट और ऑनलाइन पर ऑडियंस की मेरे बारे में हर समय बनी राय के बावजूद बेहतर होने पर फोकस किया है। इन सब से डील करना आसान नहीं है। मुझे खुशी है कि असलियत अलग है, मेरे आस-पास ऐसे लोग हैं जो हर सप्ताह और हर दिन मेरा समर्थन करते हैं। ये लोग यहां अपना बेस्ट करने और अपना बेस्ट देने के लिए हैं, जो मुझे पुश करता रहता है।

उन्होंने कहा, मैं यह खिताब उन सभी लोगों को समर्पित करना चाहती हूं जिन्हें गलत तरीके से जज किया जा रहा है या जिन्हें नफरत का सामना करना पड़ रहा है, चाहे वह खेल में हो या जिंदगी के किसी और क्षेत्र में। मुझे पता है कि यह कितना भारी लग सकता है। सच कहूं तो, उन विचारों को पावर देना सही नहीं है, और यह जानना जरूरी है। आगे बढ़ते रहो, पूरी कोशिश करते रहो, खुद पर फोकस करते रहो, क्योंकि यही सबसे अच्छी चीज है जो तुम कर सकते हो। हमेशा वह सब याद रखो जो आने वाला है और वह सब कुछ जो तुम हासिल कर सकते हो। हां, हम यहां हैं।

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(नई दिल्ली)दुनिया में मंदी की आहट, लाल सागर में भारी संकट… फिर भी भारत ने कर दिया कमाल, एक्सपोर्ट डेटा ने सबको चौंकाया

नई दिल्ली ,14 अगस्त ,। दुनिया के कई हिस्सों, खासकर पश्चिम एशिया में इस वक्त गहरा तनाव है। लाल सागर से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक माल ढुलाई को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। लगातार बढ़ते माल भाड़े और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच दुनिया मानकर चल रही थी कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को तगड़ा झटका लगेगा। लेकिन इन तमाम विपरीत परिस्थितियों को धता बताते हुए भारत ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर के आर्थिक जानकारों को हैरान कर दिया है। जुलाई महीने के जो ताजा एक्सपोर्ट (निर्यात) और इंपोर्ट (आयात) के आंकड़े सामने आए हैं, वे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भयंकर अनिश्चितता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां के सामानों ने दुनियाभर के बाजारों में अपनी जबरदस्त धाक जमा ली है।

इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों ने गाड़े झंडे

कॉमर्स मिनिस्ट्री की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस भयंकर लॉजिस्टिक संकट के बावजूद जुलाई महीने में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (मूर्त वस्तुओं का निर्यात) रिकॉर्ड 44.24 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 19.63 फीसदी ज्यादा है। मुख्य रूप से इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स के सामानों की भारी मांग के कारण ही भारत यह छलांग लगा पाया है। फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स के अध्यक्ष एससी राल्हन के अनुसार, मुश्किल समय में यह रिकॉर्ड दिखाता है कि भारतीय व्यवसायों में किसी भी संकट से निपटने की गजब की क्षमता है। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम एशिया, जहां से सबसे ज्यादा संकट की खबरें आ रही हैं, वहां भी भारत के निर्यात में लगभग 8.62 फीसदी का शानदार उछाल दर्ज किया गया है।

आयात भी 9 महीने के टॉप पर, व्यापार घाटे में आया उछाल

निर्यात के साथ-साथ भारत के आयात में भी भारी तेजी देखने को मिली है। फर्टिलाइजर, पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और कोयले जैसी जरूरी चीजों की घरेलू मांग बढ़ने के चलते जुलाई में कुल आयात 76.22 बिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले नौ महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। चूंकि निर्यात के मुकाबले आयात कहीं ज्यादा रफ्तार से बढ़ा है, इसलिए देश का व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) भी पिछले साल के 27.88 बिलियन डॉलर से बढ़कर 31.98 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। हालांकि, कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि व्यापार के प्रतिशत के तौर पर यह घाटा पिछले साल के 27.3 फीसदी से घटकर अब 26.5 फीसदी रह गया है।

सोने-चांदी की चाल और नाथू ला दर्रे से फिर शुरू हुआ व्यापार

कीमती धातुओं के मोर्चे पर सरकार के उस फैसले का असर साफ़ दिखा, जिसमें मई में कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया था। जुलाई में चांदी का आयात 66.1 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 171.68 मिलियन डॉलर पर सिमट गया, जबकि सोने का आयात 4.77 फीसदी बढ़कर 4.16 बिलियन डॉलर रहा। इन आंकड़ों से यह भी साफ हुआ है कि अमेरिका फिलहाल भारत के सामानों का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, जबकि चीन से भारत सबसे ज्यादा माल आयात कर रहा है। इसके साथ ही, व्यापारिक मोर्चे पर एक और बड़ी खुशखबरी यह है कि 1 अगस्त 2026 से सिक्किम के नाथू ला रूट के जरिए सीमा व्यापार छह साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू हो गया है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक संबंधों और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड को और अधिक मजबूती मिलेगी।

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(नई दिल्ली)पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबलिंग में देरी से नाराज सुप्रीम कोर्ट, केंद्र और एफएसएसएआई को लगाई फटकार

नई दिल्ली ,14 अगस्त ,। सुप्रीम कोर्ट ने अधिक चीनी, नमक और संतृप्त वसा वाले पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लागू करने में देरी को लेकर गुरुवार को केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से अदालत के पहले के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। पीठ ने सवाल किया कि सरकार सख्त पोषण संबंधी चेतावनियां लागू करने से क्यों हिचक रही है और अब तक उठाए गए कदमों का ब्योरा मांगा।

पीठ ने एफएसएसएआई से पूछा, क्या आप नहीं चाहते कि इस देश के लोग, खासकर बढ़ते बच्चे, स्वस्थ रहें?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपभोक्ताओं को यह सामान्य जानकारी होती है कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में चीनी, वसा और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, लेकिन पैकेट के सामने स्पष्ट चेतावनी होने से उन्हें उत्पाद खरीदने से पहले बेहतर और सूचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

अदालत ने चेतावनी लेबल से निर्माताओं के कारोबार पर असर पड़ने की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि किसी उत्पाद को खरीदना है या नहीं, इसका अंतिम फैसला उपभोक्ता का होता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक हितों को सार्वजनिक स्वास्थ्य से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

पीठ ने कहा, यह नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। निर्माता ऐसे मामलों में नीति तय नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी विशेष उत्पाद को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को इस बात की पूरी जानकारी हो कि वे क्या खा रहे हैं।

पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र ने दलील दी थी कि पैकेजिंग और पोषण संबंधी चेतावनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यवस्था बनाने में व्यावहारिक चुनौतियां हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि भारत मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों में देरी के लिए विदेशी मानकों का हवाला नहीं दे सकता।

अदालत ने कहा कि भारत को अपने नागरिकों, विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए और कमजोर नियामकीय व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को तय करना होगा कि वह प्रस्तावित लेबलिंग व्यवस्था को स्वेच्छा से लागू करती है या फिर न्यायिक निर्देश का सामना करती है। पीठ ने इसे सरकार का अंतिम अवसर बताते हुए चेतावनी दी कि यदि कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वह मामले में अपना फैसला सुना देगी।

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(मुंबई)वैश्विक तनावों के बीच बाजार में गिरावट की लहर, सेंसेक्स 300 अंक फिसला, निफ्टी मेटल पर सबसे ज्यादा दबाव

मुंबई ,14 अगस्त ,। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। यह लगातार पांचवां सत्र है जब घरेलू बाजार दबाव में ट्रेड करता नजर आया। अमेरिका द्वारा अनिश्चितकालीन नौसैनिक नाकाबंदी की धमकी के बाद तेल की कीमतों में स्थिरता आने से प्रमुख बेंचमार्क, निफ्टी50 और सेंसेक्स में गिरावट आई।

इस बीच, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,079.96 से 0.22 प्रतिशत यानी 176.53 अंक गिरकर 77,903.43 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,395.85 से 0.13 प्रतिशत यानी करीब 34 अंक गिरकर 24,361.90 पर खुला।

खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 320 अंक यानी 0.41 प्रतिशत लुढ़ककर 77,760.40 पर ट्रेड करता नजर आया, जबकि 74.90 (0.31 प्रतिशत) अंक फिसलकर 24,320.95 पर कारोबार करता दिखाई दिया।

इस दौरान, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.39 प्रतिशत, तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.18 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर, जिसमें 0.32 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा दबाव में दिखाई दिया, जिसमें 1.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो में 0.87 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 0.58 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 0.53 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए 24,250 से 24,300 का स्तर निकटतम सपोर्ट और 24,500 से 24,550 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

पिछले सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 510 करोड़ के शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मजबूत खरीदारी जारी रखी और 4,353 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, जिससे विदेशी बिकवाली के दबाव से बाजार को सहारा मिला।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, निकट भविष्य में बाजार का माहौल सावधानी के साथ सकारात्मक बना हुआ है; कच्चे तेल की कम कीमतें और मजबूत ग्लोबल इक्विटीज से कुछ राहत मिल रही है। हालाकि, जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अहम स्तरों के पास हालिया कंसोलिडेशन (बाजार का एक दायरे में घूमना) के कारण बढ़त सीमित रह सकती है। उतार-चढ़ाव के अपेक्षाकृत नियंत्रित रहने के कारण, सेक्टर रोटेशन और खास शेयरों में खरीदारी अहम कारक बने रहने की संभावना है, जिससे बाजार का कुल रुख एक दायरे में या थोड़ा सकारात्मक रह सकता है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि निकट भविष्य में बाजार के एक दायरे में रहने की संभावना है। निफ्टी 23,800 और 24,400 के बीच कंसोलिडेट कर रहा है और ऊपरी या निचले स्तर को तोड़ने (ब्रेकआउट) के लिए कोई खास ट्रिगर नहीं मिला है। निफ्टी ऊपरी स्तर को तोड़ने के लिए तैयार था, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच अपेक्षित डील न होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर के पार चली गईं, जिससे यह कोशिश नाकाम हो गई।

एक्सपर्ट ने बताया कि अब ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर 87 डॉलर से नीचे आ गई हैं, जो बाजार के लिए थोड़ी सकारात्मक बात है। हालांकि एफपीआई की बिकवाली कम हो गई है और हाल ही में वे खरीदार बन गए हैं, फिर भी एफआईआई की गतिविधियों में कोई स्पष्ट ट्रेंड अभी तक नहीं दिखा है। अब ज्यादातर गतिविधियां मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में हो रही हैं। यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है। कुछ चुनिंदा प्राइवेट सेक्टर बैंक लंबे समय के लिए वैल्यू बाइंग (सही कीमत पर खरीदारी) के मौके दे रहे हैं।

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(मुंबई)सोने की कीमतों में मामूली गिरावट, चांदी का दाम करीब 3 हजार रुपए घटा

मुंबई ,14 अगस्त ,। सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को गिरावट देखने को मिली है। इसकी वजह मुनाफावसूली को माना जा रहा है।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) की ओर से जारी डेटा के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 348 रुपए कम होकर 1,53,071 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,53,419 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

22 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,40,213 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,40,532 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

18 कैरेट सोने की कीमत 1,15,064 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,14,803 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमी देखी गई है।

चांदी का दाम 2,986 रुपए कम होकर 2,34,228 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,37,214 रुपए प्रति किलो था।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिल रही है। सोने का दाम 0.39 प्रतिशत घटकर 4,449 डॉलर प्रति औंस और चांदी का कीमत 0.57 प्रतिशत घटकर 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।

जानकारों ने कहा कि सत्र में सोने की कीमतों में गिरावट आई और एमसीएक्स गोल्ड लगभग 800 रुपए गिरकर 1,54,050 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि कॉमेक्स पर गोल्ड लगभग 25 डॉलर गिर गया।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका में महंगाई दर 3.4 प्रतिशत रही, जो काफी हद तक उम्मीदों के मुताबिक थी। इससे प्रॉफिट बुकिंग हुई क्योंकि हालिया तेजी के दौरान कम महंगाई के असर को पहले ही सोने की कीमतों में शामिल कर लिया गया था। आगे चलकर, बाजार अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की कीमतों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े नए संकेतों पर नजर रखेगा। तकनीकी तौर पर, 1,52,000–1,52,500 रुपए प्रति 10 ग्राम का स्तर मुख्य सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि

1,55,500-1,56,000 रुपए प्रति 10 ग्राम का स्तर तत्काल रुकावट का स्तर है।

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