साहित्य के क्षेत्र में डॉ. रश्मि श्रीवास्तव , विभागाध्यक्ष, बी.एड. विभाग, महिला विद्यालय डिग्री कॉलेज, लखनऊ को विशिष्ट सम्मान
लखनऊ, 06 सितंबर 2026। हिंदी संस्थान के ऐतिहासिक निराला सभागार में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, बी.एड. विभाग, महिला विद्यालय डिग्री कॉलेज, लखनऊ को विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया गया।
यह भव्य सारस्वत समारोह डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव साहित्यिक संस्थान, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित किया गया। समारोह का आयोजन हिंदी संस्थान, लखनऊ के प्रथम संपादक रहे डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव की 105वीं जन्म जयंती के अवसर पर किया गया।
इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए श्री देवकी नंदन शांत, श्री पद्मकांत शर्मा ‘प्रभात’, डॉ. वीरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. नागेश पांडेय, डॉ. कविंद्र कुमार राजपूत, श्रीमती सीमा श्रीवास्तव एवं श्रीमती स्मिता अश्विन शर्मा सहित विभिन्न साहित्यिक विभूतियों को सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान श्रीमती अलका प्रमोद की कृति ‘साहित्य साधक वैज्ञानिक डॉ. रामकठिन सिंह’ पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया। पुस्तक में साहित्य एवं विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. रामकठिन सिंह के योगदान और उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित किया गया है। पुस्तक के लोकार्पण को समारोह का एक महत्वपूर्ण साहित्यिक आकर्षण माना गया।
सम्मान प्राप्त करने के उपरांत पत्रकार वार्ता में डॉ. रश्मि श्रीवास्तव ने कहा कि यह सम्मान उनके जीवन के अत्यंत यादगार सम्मानों में से एक है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से शिक्षक दिवस के अवसर पर प्राप्त यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. रश्मि श्रीवास्तव की लगभग एक दर्जन पुस्तकें देश के प्रतिष्ठित प्रकाशनों से प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य के क्षेत्र में अपनी इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपने पति इंजीनियर ए.के. श्रीवास्तव एवं अपने दोनों बच्चों अमृतांश श्रीवास्तव तथा अभिनव श्रीवास्तव को दिया, उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के निर्माण में बाल साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और बच्चों में संस्कार, रचनात्मकता तथा राष्ट्रबोध विकसित करने में साहित्य का विशेष योगदान रहेगा।
समारोह में डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव साहित्यिक संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष इंजीनियर विनय श्रीवास्तव ने अपने पिता डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष इस प्रकार के साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की परंपरा को आगे बढ़ाने की बात कही।
इस अवसर पर डॉ. रामकठिन सिंह, डॉ. मिथिलेश दीक्षित, डॉ. अमिता दुबे एवं श्रीमती अलका प्रमोद सहित अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
समारोह में साहित्य, शिक्षा एवं समाज के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

