अयोध्या जमथरा मे भगवानदीन निषाद एवं प्रदीप निषाद के संयोजक में वोट बढाओ बूथ जिताओ एवं श्रमकार्ड अभियान में मुख्य अतिथि सरोज यादव महानगर अध्यक्ष महिला सभा एवं Sc/st प्रकोष्ठ महासचिव प्रवीन राठौर जी रहे सरोज यादव ने कहा किभाजपा राज में महंगाई आसमान छू रही है, किसानों को धोखा मिला, ऐतिहासिक बेरोजगारी से नौजवान परेशान जनता की आवाज को दबाने का काम किया जा रहा है, जनसामान्य उत्पीड़न का शिकार हो रहा है। उज्जवला योजना के लाभार्थी मिट्टी के चूल्हे पर भोजन पकाने को लोग मजबूर है क्योंकि महगाई के कारण गैस सिलेंडर भरवाना मुश्किल हो रहा है इसलिए भाजपा से मुक्ति चाहते हैं। उनका भरोसा समाजवादी पार्टी पर है। भाजपा सन् 2022 के चुनावों में कोई साजिश न कर सके इसलिए सबको सतर्क रहकर अपने-अपने काम को निष्ठा से अंजाम देना होगा। एक नज़र भाजपा पर और दूसरी नज़र बूथ पर रखना है।
पहली बात तो यह कि अभी धान क्रय केन्द्र खुले ही नहीं है। पिछली बार भी किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिला था। मजबूरी में तय मूल्य के नीचे मंडी में उसे हजार रूपये और उससे भी कम रूपये में अपनी फसल बेचनी पड़ गई थी। खरीद की प्रक्रिया बहुत धीमी
किसानों को भाजपा राज में ही सर्वाधिक अपमानित और उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है। खाद के दाम बढ़ा दिए गए है। डीजल पेट्रोल और बिजली पहले से ही महंगी कर दी है।
किसानों की बात करने वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने 4 साल तक गन्ने के दाम नहीं बढ़ाए।
अभी असमय वर्षा और आंधी ने फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। खेद की बात है कि भाजपा सरकार किसानों को राहत पहुंचाने में रुचि नहीं लेती है। उसकी मानसिकता तो यह है कि जो किसान आवाज उठाए उसे कुचल दो। लखीमपुर काण्ड इसका जीता-जागता उदाहरण हैं इससे जाहिर है कि भाजपा पूंजी घरानों की ही हित चिंता करती, इसलिए उसने चीनी मिलों के मालिकों को तो कई रियायतें दी परन्तु किसानों को गन्ने का बकाया मूल्य मिले इसकी व्यवस्था नहीं की। एमएसपी की अनिवार्यता की मांग को भी उसने नहीं माना है।
आज प्रदेश की जनता के समक्ष न केवल संविधान अपितु किसान और देश को बचाने के लिए भाजपा को हटाना ही एक मात्र विकल्प रह गया है। वैसे भी भाजपा से कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि उसमें जनहित में कोई काम करने की इच्छा शक्ति नहीं है। जागरूक मतदाता ही सन् 2022 में भाजपा की साजिशों का सामना कर उसे परास्त कर सकते है। इस अवसर पर पुष्पा देवी, सीता, लक्ष्मी, जय कला, नेहा, शर्मिला, गोपी, राधा, ममता,ललिता निषाद, सुषमा निषाद आदि।

