स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण की प्रासंगिकता पर भाषण प्रतियोगिता, आस्था सिंह रहीं अव्वल

61 विद्यार्थियों ने लिया प्रतिभाग, वैशाली राय द्वितीय और अमृता सिंह तृतीय

देश की उपासना समाचार पत्र

धनन्जय विश्वकर्मा 

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद के शिकागो धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण की प्रासंगिकता विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन उमानाथ सिंह इंजीनियरिंग संस्थान में किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न पाठ्यक्रमों के 61 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के उपरांत शुक्रवार को स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में सम्मान एवं समापन समारोह आयोजित किया गया।

 

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने स्वामी विवेकानंद के 11 सितंबर 1893 को शिकागो धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, धार्मिक सहिष्णुता, विश्वबंधुत्व और मानवता के संदेश को विद्यार्थियों ने प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया। वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, सहिष्णुता, आत्मविश्वास तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचारों को आज भी महत्वपूर्ण बताया।

प्रतियोगिता में एचआरडी विभाग की छात्रा आस्था सिंह ने सर्वाधिक अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। वैशाली राय ने द्वितीय तथा अमृता सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में आयोजित सम्मान समारोह में विजेता विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और मानवतावादी दृष्टिकोण का विश्व के समक्ष प्रभावशाली परिचय था। उनके विचार आज भी युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन, सेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।

 

मानद पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. राजकुमार सोनी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का शिकागो भाषण केवल एक ऐतिहासिक संबोधन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, सहिष्णुता और विश्वबंधुत्व का वैश्विक संदेश है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वामी विवेकानंद के साहित्य एवं विचारों का अध्ययन कर उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।

 

कार्यक्रम संयोजक एवं एचआरडी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रसिकेश ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति क्षमता, सार्वजनिक वक्तृत्व-कौशल तथा भारतीय संस्कृति और मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और चिंतन युवाओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

 

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. मनीष कुमार गुप्ता, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. इंद्रेश गंगवार एवं शोधार्थी उद्देश्य सिंह शामिल रहे। निर्णायक मंडल के निर्णय के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया।

इस अवसर पर डॉ. मनीष कुमार गुप्ता, प्रो. मिथिलेश, डॉ. इंद्रेश गंगवार, डॉ. अनुपम कुमार, डॉ. प्रवीण मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन छात्र अवंतिका यादव एवं प्रांजल मौर्य ने किया। स्वयंसेवक इंचार्ज दिव्यांशु सिंह एवं ऐशवी अस्थाना रहे। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम आयोजक प्रो. राजकुमार ने किया।

 

कार्यक्रम में खुशी सिंह, कुणाल मिश्रा, निधि सिंह, अनुराग तिवारी, उज्ज्वल सिंह, संजना मिश्रा, अर्चना, साक्ष्य, अभय सिंह सहित विभिन्न संकायों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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