(नईदिल्ली)मोदी-जिनपिंग के मुलाकात के बाद सीमा विवाद पर भारत और चीन के बयानों में मतभेद सामने आए
0-चीन ने संबंधों और सीमा प्रश्न पर समानांतर प्रगति की बात कही, भारत ने सीमा पर शांति को द्विपक्षीय संबंधों का आधार बताया
नई दिल्ली ,13 सितंबर (आरएनएस)। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद भारत और चीन ने अलग-अलग बयान जारी किए हैं। दोनों देशों के बयानों में सीमा विवाद को लेकर दृष्टिकोण का अंतर सामने आया है। यह अंतर सीमा प्रश्न और व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के बीच दोनों देशों की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
चीन ने दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सीमा विवाद के समाधान की दिशा में भी प्रयास जारी रखने की बात कही। चीनी पक्ष ने दोनों मोर्चों पर ‘समानांतर और एक-दूसरे को मजबूत करने वाली प्रगतिÓ की आवश्यकता बताई।
चीन के अनुसार, दोनों पक्षों को द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और सीमा विवाद के समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
चीनी पक्ष ने कहा कि दोनों देशों को संबंधों और सीमा विवाद, दोनों पर समानांतर रूप से प्रगति करनी चाहिए तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखनी चाहिए।
भारत ने बैठक के संबंध में जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को दोनों देशों के संबंधों के निरंतर विकास के लिए जरूरी आधार बताया।
प्रधानमंत्री ने सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और दोनों पक्षों के बीच बनी सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। भारत के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा प्रश्न का निष्पक्ष, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने की प्रतिबद्धता जताई।
भारत और चीन के बयानों की तुलना करने पर दोनों देशों के दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। चीन ने सीमा विवाद के समाधान और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए समानांतर प्रगति की बात कही है। यानी सीमा प्रश्न के पूरी तरह हल नहीं होने के बावजूद व्यापक संबंधों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश चीन ने बरकरार रखी है।
इसके विपरीत भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को दोनों देशों के व्यापक संबंधों के निरंतर विकास का आधार बताया है। भारत ने सीमा से संबंधित मौजूदा समझौतों और सहमतियों के पालन को भी महत्वपूर्ण बताया है।
इससे संकेत मिलता है कि भारत के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण शर्त है, जबकि चीन दोनों क्षेत्रों में एक साथ प्रगति का पक्षधर दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों, अन्य भागीदार देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन भी किया था। हालांकि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसमें शामिल नहीं हुए।
जिनपिंग के रात्रिभोज में शामिल नहीं होने की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि वह आराम करने के लिए अपने होटल लौट गए थे।
वहीं, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद भी रात्रिभोज में शामिल नहीं हुए। वह एक दिन पहले ही अबू धाबी लौट चुके थे।
मोदी और जिनपिंग की बैठक ऐसे समय हुई है, जब भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। दोनों देशों के हालिया बयानों से स्पष्ट है कि सीमा विवाद का समाधान और व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की दिशा दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन्हें लेकर दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं में अंतर अब भी बना हुआ है।
००

