मेदांता में जिंदगी की जंग लड़ रही बेटी,न्याय के लिए पुलिस व जनता दरबार तक भटक रही मां
आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर,कार्रवाई में देरी पर उठे गंभीर सवाल
लखनऊ।एक मां की बेटी मेदांता अस्पताल लखनऊ के बेड पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है और मां अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए थाने से लेकर मुख्यमंत्री दरबार तक फरियाद लेकर चक्कर लगा रही है।मामला थाना सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र का है,जहां 21 वर्षीय युवती के साथ कथित मारपीट, मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना, यौन उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।पीड़िता की मां रतना का आरोप है कि उसकी बेटी के साथ उसके कथित बॉयफ्रेंड प्रियांशु गुप्ता निवासी लाला टेरी, बझरिया, शाहजहांपुर द्वारा लंबे समय से प्रताड़ना और मारपीट की जा रही थी।आरोप है कि 31 अगस्त को लखनऊ में हुई एक गंभीर घटना के बाद बेटी की हालत बिगड़ गई,जिसके बाद उसे मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।मां के मुताबिक,बेटी अभी भी गंभीर हालत में उपचार चल रहा है।देखा जाये तो शिकायत लेकर थाने से सीएम दरबार तक पहुंची मां रतना का कहना है कि उसने स्थानीय थाना सुशांत गोल्फ सिटी में शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।इसके बाद वह अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई दरबार तक भी पहुंची,लेकिन आरोप है कि अभी तक आरोपी की गिरफ्तारी अथवा मामले में अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामला कार्रवाई के इंतजार में अटका हुआ है और आरोपी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।पीड़िता की मां ने दावा किया है कि उसके पास मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।इनमें बेटी को कथित रूप से कमरे में बंद कर डराने-धमकाने की वीडियो रिकॉर्डिंग, कथित प्रताड़ना से संबंधित वीडियो, गाली-गलौज एवं अभद्र भाषा की कॉल रिकॉर्डिंग,सीसीटीवी फुटेज तथा अस्पताल में उपचार और चोटों से संबंधित मेडिकल दस्तावेज शामिल हैं।पीडिता मां की मांग है कि इन सभी साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कराते हुए निष्पक्ष जांच का हिस्सा बनाया जाए, ताकि मामले की वास्तविकता सामने आ सके।पुलिस कर्मियों पर भी लगाए गंभीर आरोप पीड़िता रतना ने कुछ पुलिसकर्मियों पर मामले को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है।उसने विशेष रूप से पुलिस कर्मी सूरज सिंह और अरविंद यादव का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके स्तर से मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिस कर्मियों का पक्ष सामने आना बाकी है।पीड़िता का कहना है कि आरोपी की ओर से उसके परिवार को नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका भी बनी हुई है।ऐसे में उसने परिवार और बेटी की सुरक्षा की भी मांग की है।पीड़िता की मां का कहना है कि सरकार महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए तमाम योजनाएं और अभियान चला रही है।ऐसे में यदि किसी गंभीर शिकायत पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।पीडिता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष जांच, उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित कराने,आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई तथा पीड़िता और उसके परिवार को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं।एक तरफ अस्पताल में बेटी जिंदगी की जंग लड़ रही है,दूसरी तरफ मां इंसाफ की लड़ाई। अब देखना यह है कि उसकी फरियाद पुलिस और शासन के दरवाजे से कब न्याय के दरवाजे तक पहुंचती है।

