(नई दिल्ली)स्टेट बार काउंसिल में 30प्रतिशत महिला आरक्षण पर स्ष्ट में सुनवाई, महिला वकीलों के विरोध पर सीजेआई ने जताई हैरानी

(नई दिल्ली)स्टेट बार काउंसिल में 30प्रतिशत महिला आरक्षण पर स्ष्ट में सुनवाई, महिला वकीलों के विरोध पर सीजेआई ने जताई हैरानी
नई दिल्ली ,22 सितंबर ,(आरएनएस)। देश भर की स्टेट बार काउंसिलों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया  में महिला वकीलों को 30 फीसदी आरक्षण देने के संवेदनशील मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया  की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह मामला स्टेट बार काउंसिल चुनावों और बीसीआई की प्रशासनिक संरचना में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करने की अर्जी के जरिए सामने आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने बार-बार दाखिल की जा रही अपीलों और खुद कुछ महिला वकीलों द्वारा आरक्षण के खिलाफ किए जा रहे विरोध पर कड़ी नाराजगी और आश्चर्य जाहिर किया।
सीजेआई को मिला विरोध पत्र: क्या आरक्षण का आदेश वापस ले लें?
वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने पीठ को याद दिलाया कि शीर्ष अदालत ने पहले राज्य बार काउंसिलों के चुनाव दो सप्ताह के भीतर संपन्न कराने के निर्देश दिए थे। अब नई याचिका बीसीआई की संरचना में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने से जुड़ी है। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कोर्ट को महिला आरक्षण से जुड़ा अपना पिछला आदेश वापस ले लेना चाहिए? सीजेआई ने खुलासा किया कि उन्हें महिला वकीलों का एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया के वैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण (टेकओवर) कर रहा है और वे इस अदालती आदेश के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।
‘ओल्ड फूलÓ वाले ऐतिहासिक किस्से से जस्टिस बागची ने समझाई राय और तथ्य की बात
सीजेआई के सवाल पर वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि विरोध करने वाले गुट के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि विरोध स्वरूप बांटे गए पर्चों में सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण संबंधी आदेश को ‘असंवैधानिकÓ तक करार दिया गया है। इस पर पीठ में शामिल जस्टिस बागची ने एक दिलचस्प कानूनी प्रसंग साझा करते हुए कहा कि यह सब व्यक्तिगत राय का विषय है। उन्होंने ब्रिटिश न्यायविद लॉर्ड डेनिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी ने लॉर्ड डेनिंग को ‘ओल्ड फूलÓ (बूढ़ा मूर्ख) कहा था, तो उन्होंने बेहद शांत भाव से जवाब दिया था कि ‘ओल्डÓ  होना एक तथ्य है, जबकि ‘फूलÓ (मूर्ख) समझना केवल एक राय का मामला है।
रोटेशन आधार पर महिला आरक्षण पर होगी आगे की विस्तृत सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार करते हुए स्पष्ट किया कि वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिलों में रोटेशन पद्धति के आधार पर 30 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर आगे भी विस्तृत सुनवाई जारी रखेगा। कोर्ट ने संकेत दिए कि कानूनी पेशे के शीर्ष निकायों में महिलाओं के समुचित प्रतिनिधित्व और स्वायत्तता से जुड़े सभी कानूनी बिंदुओं की गहन समीक्षा के बाद ही अंतिम दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।
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