ग्रीन गैस के नाम पर एपीके फाइल भेजकर साइबर ठगी, क्राइम ब्रांच ने जारी की चेतावनी
लखनऊ(आरएनएस )। क्राइम ब्रांच लखनऊ की ओर से ऑपरेशन डिजिटल कवच के तहत साइबर अपराध के नए तरीकों को लेकर लगातार जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में ग्रीन गैस के नाम पर मीटर या बिल अपडेट कराने के बहाने एपीके फाइल भेजकर की जा रही साइबर ठगी को लेकर आमजन को विशेष रूप से सतर्क किया गया है। क्राइम ब्रांच के मुताबिक लगातार जागरूकता और सलाह जारी किए जाने के बावजूद इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। कमिश्नरेट लखनऊ में ऐसे मामलों में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी प्रकाश में आई है। पुलिस ने नागरिकों से स्वयं सतर्क रहने के साथ परिवार, मित्रों, पड़ोसियों, आरडब्ल्यूए और परिचितों को भी इस धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करने की अपील की है।पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी एसएमएस, फोन कॉल या व्हाट्सऐप के माध्यम से लोगों से संपर्क करते हैं और खुद को ग्रीन गैस का प्रतिनिधि बताते हैं। मीटर या बिल अपडेट नहीं होने अथवा गैस कनेक्शन बंद किए जाने की बात कहकर तत्काल कार्रवाई के लिए दबाव बनाया जाता है। इसके बाद मीटर अपडेट या ग्रीन गैस मीटर अपडेट के नाम से एपीके फाइल भेजकर उसे मोबाइल में स्थापित करने के लिए कहा जाता है। ऐसी फाइल स्थापित होने के बाद अपराधियों को मोबाइल तक दूरस्थ पहुंच मिल सकती है और बैंकिंग संबंधी जानकारी का दुरुपयोग कर खातों से रकम निकाली जा सकती है।जांच में यह भी सामने आया है कि अपराधी ग्रीन गैस उपभोक्ताओं से संबंधित उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल कर उन्हें निशाना बना रहे हैं। इसी तरह की धोखाधड़ी की जानकारी आगरा के ग्रीन गैस उपभोक्ताओं के साथ भी सामने आई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति द्वारा नाम, पता अथवा ग्रीन गैस कनेक्शन से संबंधित जानकारी बता दिए जाने मात्र से उसकी पहचान को वास्तविक न माना जाए।ग्रीन गैस के नाम से कोई कॉल या संदेश प्राप्त होने पर घबराकर अथवा दबाव में आकर तत्काल कोई कार्रवाई न करें। संदेश में दिए गए मोबाइल नंबर या लिंक के बजाय स्वयं ग्रीन गैस के अधिकृत माध्यमों से जानकारी की पुष्टि करें। इसके लिए ग्रीन गैस ग्राहक सेवा नंबर 6390905003, अधिकृत जीजीएल एंगेज एप और अधिकृत ग्राहक सेवा ईमेल customercare.lko@gglonline.net का इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी की ओर से अधिकृत एसएमएस पहचान GGLPNG-S बताई गई है।क्राइम ब्रांच ने नागरिकों से कहा है कि किसी अज्ञात स्रोत से मिली एपीके फाइल डाउनलोड या स्थापित न करें और संदिग्ध एसएमएस या व्हाट्सऐप लिंक पर क्लिक न करें। मीटर या बिल अपडेट के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर भुगतान न करें। ओटीपी, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी, सीवीवी, पिन अथवा बैंकिंग संबंधी कोई जानकारी किसी से साझा न करें। किसी अनजान व्यक्ति को मोबाइल की स्क्रीन साझा करने या दूरस्थ पहुंच देने से भी बचें। गैस कनेक्शन बंद किए जाने की धमकी अथवा किसी अन्य दबाव में आकर तत्काल निर्णय न लें।पुलिस ने लोगों से संदिग्ध कॉल या संदेश की जानकारी अधिकृत ग्राहक सेवा, अधिकृत एप या ईमेल के माध्यम से स्वयं सत्यापित करने की अपील की है। संदिग्ध एपीके फाइल या लिंक को आगे प्रसारित न करें और विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों सहित परिवार एवं परिचितों को इस धोखाधड़ी के बारे में जागरूक करें। संदिग्ध साइबर गतिविधि की सूचना क्राइम ब्रांच संगठित अपराध हेल्पलाइन 7839861034 पर दी जा सकती है। आर्थिक साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 पर संपर्क करने की अपील की गई है।प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने ग्रीन गैस कंपनी के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक उपभोक्ता जागरूकता अभियान शुरू करने की बात कही है। ग्रीन गैस कनेक्शन वाले क्षेत्रों की आरडब्ल्यूए के साथ स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने, समय-समय पर उपभोक्ताओं को सामूहिक संदेश भेजकर जानकारी देने तथा आवासीय क्षेत्रों में उद्घोषणा के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित करने की योजना है। उपभोक्ताओं को केवल अधिकृत ग्राहक सेवा नंबर, एप और ईमेल के माध्यम से जानकारी सत्यापित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आरडब्ल्यूए परिसरों के बाहर और शहर के प्रमुख चौराहों पर जागरूकता संबंधी बैनर व पोस्टर भी लगाए जाएंगे।क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगी की रकम से बिल भुगतान के नाम पर होने वाली गतिविधियों को लेकर भी लोगों को सावधान किया है। जांच में सामने आया है कि कुछ मामलों में साइबर अपराध से प्राप्त रकम का इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड, बिजली और इंटरनेट बिल आदि के भुगतान में किया जा रहा है। इसके बदले कम रकम में बिल भुगतान कराने या कमीशन के लालच में संबंधित व्यक्ति को नकद धनराशि दी जाती है। पुलिस ने लोगों से ऐसे किसी प्रस्ताव को स्वीकार न करने और किसी अनजान व्यक्ति से अपने बिजली, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट या अन्य बिल का भुगतान न कराने की अपील की है। पुलिस के अनुसार ऐसी व्यवस्था साइबर अपराध की रकम को खपाने का माध्यम हो सकती है। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका साइबर अपराध की रकम के बारे में जानकारी या संदेह होने के बावजूद उसके इस्तेमाल अथवा सहयोग में पाई जाती है तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव ने बताया कि क्राइम ब्रांच लखनऊ द्वारा ऑपरेशन डिजिटल कवच के तहत ग्रीन गैस के नाम पर हो रहे साइबर फ्रॉड के संबंध में लगातार व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ग्रीन गैस कंपनी के साथ समन्वय कर जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाया जा रहा है। सामने आए मामलों की गहन जांच के साथ साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों का विस्तृत विश्लेषण भी किया जा रहा है। क्राइम ब्रांच की ओर से इस संबंध में जागरूकता पोस्टर भी जारी किया गया है। लोगों से अपील की गई है कि पोस्टर को अपने मोबाइल में सुरक्षित रखें और परिवार, मित्रों, परिचितों, पड़ोसियों तथा आरडब्ल्यूए समूहों में अधिक से अधिक साझा करें, ताकि समय रहते साइबर धोखाधड़ी से बचाव किया जा सके। पुलिस ने कहा कि साइबर जागरूकता ही बचाव है।
ग्रीन गैस के नाम पर एपीके फाइल भेजकर साइबर ठगी, क्राइम ब्रांच ने जारी की चेतावनी
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